
सीहोर। जिलेभर में चल रही भीषण गर्मी में अघोषित बिजली कटौती से लोग हलाकान हैं। परेशान लोग अब सड़कों पर उतरकर बिजली कंपनी के खिलाफ प्रदर्शन भी कर रहे हैं। सीहोर जिले में अलग-अलग जगह बिजली कंपनी को लेकर प्रदर्शन हुए, जिसमें सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए एक बेहद अनोखा रास्ता चुना गया। आमतौर पर धरना-प्रदर्शनों में होने वाली उग्र नारेबाजी और हंगामें को छोड़कर ग्रामीण बीच सड़क पर बैठ गए और ढोलक, पेटी व झांझ-मजीरे के साथ भजन-कीर्तन शुरू कर दिया। इधर बिजली कंपनी की तानाशाही और अघोषित कटौती के खिलाफ अमलाहा क्षेत्र के ग्रामीणों और किसानों का धैर्य रविवार को पूरी तरह जवाब दे गया। पिछले 15 दिनों से लगातार रात के समय हो रही कटौती से नाराज सैकड़ों ग्रामीण और किसान सड़कों पर उतर आए। आक्रोशित जनता ने अमलाहा डीसी पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया और इंदौर-भोपाल हाईवे पर चक्काजाम कर दिया। इस दौरान आंदोलनकारियों ने बिजली विभाग के खिलाफ जमकर हुंकार भरी और नारेबाजी की।
गाए मोदी-शिव के भजन, मांगी बिजली-
सीहोर-चंदेरी-बिलकिसगंज-भोपाल मार्ग पर चंदेरी और बरखेड़ी गांव के सैकड़ों किसान सुबह-सुबह ही पर धरने पर बैठ गए। किसानों ने साफ किया कि वे किसी भी तरह की हिंसा या हुड़दंग नहीं चाहते, बल्कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी पीड़ा सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। प्रदर्शन के दौरान किसान एमएस मेवाड़ा द्वारा लिखे और गाए गए विशेष भजनों ने वहां मौजूद हर व्यक्ति का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। किसानों ने अपने भजनों के जरिए सीधे दिल्ली और भोपाल की सत्ता तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की। ग्रामीण भैया शिवराज (केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान) और ‘प्रभु मोदी’ (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) से ग्रामीणों के संकट को दूर करने की गुहार लगाते दिखे। किसानों द्वारा गाए गए भजनों की ये पंक्तियां क्षेत्र में तेजी से वायरल हो रही हैं… हे प्रभु मोदी दाता, ऐसी कृपा कीजिए… सारे ग्रामीण सो नहीं पा रहे, हमको बिजली दीजिए… शिवराज भैया तुम भी सुन लो, हमको रात में बिजली दीजिए… मोदी-मोदी कह रही दुनिया, हम ग्रामीणों का संकट दूर कीजिए… मोहन भैया आप भी सुन लो, हमारी विनती सुन लीजिए…
रात की कटौती और भीषण गर्मी से छूटे पसीने-
आंदोलन कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि इस वक्त पूरा प्रदेश भीषण गर्मी की चपेट में है। ऐसे में गांवों में रात के समय भारी और अघोषित बिजली कटौती की जा रही है। उमस और तपन के कारण लोग रात भर ठीक से सो नहीं पा रहे हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। इसके अलावाए बिजली गुल रहने से खेतों के जरूरी काम भी पूरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। किसानों की सरकार से मुख्य मांग है कि ग्रामीण क्षेत्रों में कम से कम रात के समय होने वाली बिजली कटौती को तुरंत बंद किया जाए, ताकि दिनभर खेतों में हाड़तोड़ मेहनत करने वाले किसानों को रात में चैन की नींद मिल सके। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो वे अपनी इस भजन मंडली को और बड़ा रूप देने पर मजबूर होंगे।
ग्रामीण-किसानों ने घेरा भोपाल-इंदौर हाईवे-
सीहोर जिला मुख्यालय के नजदीकी ग्रामीण इलाकों में भीषण गर्मी के बीच अघोषित बिजली कटौती ने आम जनता का जीना मुहाल कर दिया है। बिजली कंपनी की तानाशाही और अघोषित कटौती के खिलाफ अमलाहा क्षेत्र के ग्रामीणों और किसानों का धैर्य पूरी तरह जवाब दे गया। पिछले 15 दिनों से लगातार रात के समय हो रही कटौती से नाराज सैकड़ों ग्रामीण और किसान सडक़ों पर उतर आए। ग्रामीणों का कहना है कि इस समय क्षेत्र में भीषण गर्मी और उमस का प्रकोप है, लेकिन बिजली कंपनी बिना किसी पूर्व सूचना के रात-रात भर कई-कई घंटों के लिए बत्ती गुल कर देती है। रविवार को हुए इस चक्काजाम के कारण इंदौर-भोपाल हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आवागमन पूरी तरह ठप्प हो गया। हाईवे पर जाम की खबर मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस का अमला दल-बल के साथ मौके पर पहुंचा। अधिकारियों ने आक्रोशित ग्रामीणों को काफी समझाइश दी और बिजली व्यवस्था में सुधार का भरोसा दिलाकर जैसे-तैसे प्रदर्शनकारियों को सड़क से हटाया, जिसके बाद यातायात सुचारु हो सका। प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों को एक ज्ञापन सौंपकर अपनी जमीनी दिक्कतों को प्रमुखता से बयां किया। ग्रामीणों ने बताया कि रात के समय बार-बार बिजली कटने से उमस और मच्छरों के कारण छोटे बच्चों और बुजुर्गों का सोना दूभर हो गया है। नींद पूरी न होने से लोग बीमार पड़ रहे हैं। परीक्षा और आगामी सत्र की तैयारियों में जुटे स्कूली बच्चों की पढ़ाई रात के अंधेरे के कारण पूरी तरह प्रभावित हो रही है। किसानों को खेतों की सिंचाई और कृषि से जुड़े जरूरी कामों में भारी परेशानी आ रही है, वहीं स्थानीय व्यापारियों का धंधा भी इस कटौती की वजह से ठप होने की कगार पर पहुंच गया है। ग्रामीणों और किसान नेताओं ने बिजली कंपनी के आला अधिकारियों को दो टूक लहजे में साफ चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि आगामी 72 घंटे के भीतर अमलाहा क्षेत्र की रात्रिकालीन बिजली आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु नहीं किया गया और अघोषित कटौती पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई तो क्षेत्र की जनता एक बार फिर सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि 72 घंटे के अल्टीमेटम के बाद होने वाले किसी भी उग्र आंदोलन, प्रदर्शन या चक्काजाम की संपूर्ण जिम्मेदारी बिजली कंपनी और स्थानीय प्रशासन की होगी।
जिलेभर में बन रहे खराब हालात-

बिजली कटौती को लेकर जिलेभर में बेहद गंभीर स्थिति बन रही है। एक तरफ भीषण गर्मी पड़ रही है तो वहीं दूसरी ओर बिजली कंपनी कई घंटों तक बिजली की कटौती कर रही है। जिले के आष्टा, बुधनी, भैरूंदा, रेहटी सहित कई क्षेत्रों में यह स्थिति बनी हुई है। हालांकि अधिकारी इसे लोड शेडिंग बताकर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहे हैं। बिजली कंपनी के अधिकारियों ने सोशल मीडिया पर एक पोस्टर भी जारी किया है, जिसमें बताया गया है कि बिजली की लगातार बढ़ती मांग एवं ज्यादा लोड के कारण विद्युत व्यवस्था को संतुलित बनाए रखने के लिए कुछ क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार लोड शेडिंग की जा रही है। विद्युत व्यवस्था को संतुलित बनाए रखने के लिए जिलावार एवं चरणबद्ध तरीके से लाइने बंद की जाती है।



