कागजी दावों की खुली पोल, प्री-मानसून बारिश ने बिगाड़ी इछावर की सूरत

राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा के गृह नगर में बदहाल हुई सफाई व्यवस्था, नालियों का कीचड़ सडक़ों पर आया, बीमारी फैलने का खतरा

सीहोर। कहते हैं कि ‘कागज के फूल’ कभी खुशबू नहीं देते, ठीक उसी तरह प्रशासन के ‘कागजी दावे’ भी पहली ही बारिश में बह जाते हैं। कुछ ऐसा ही नजारा जिले के इछावर में देखने को मिला है। मानसून की दस्तक से पहले हुई हल्की सी प्री-मानसून बारिश ने ही इछावर नगर परिषद के स्वच्छता के बड़े-बड़े दावों की पोल खोलकर रख दी है। परिषद की तैयारियों की हकीकत अब सडक़ों पर बहते कीचड़ के रूप में नजर आ रही है, जो नगर परिषद की घोर लापरवाही और उदासीनता की गवाही दे रही है।
चौंकाने वाली बात यह है कि इछावर प्रदेश सरकार के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा का गृह नगर है। बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस इछावर नगर परिषद ने स्वच्छता के नाम पर अब तक लाखों रुपये पानी की तरह बहा दिए और जो परिषद दिल्ली-भोपाल से स्वच्छता का अवार्ड लेकर अपनी पीठ थपथपाती नहीं थकती थी, आज उसी इछावर की जनता गंदगी और बदबू के साए में जीने को मजबूर क्यों है।
चोक पड़ी हैं नालियां, सडक़ों पर बहा गंदा पानी
स्थानीय निवासियों ने नगर परिषद पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा है कि जिम्मेदार अधिकारियों ने पिछले कई महीनों से शहर की नालियों की सुध ही नहीं ली। नालियां कचरे और पॉलीथिन के कारण पूरी तरह चोक हो चुकी थीं। नतीजा यह हुआ कि जैसे ही हल्की बारिश हुई, नालियों का सारा गंदा और बदबूदार पानी उफनकर मुख्य सडक़ों और लोगों के घरों के सामने आ गया। राहगीरों और वाहन चालकों का इस कीचड़ के बीच से गुजरना दूभर हो गया है।
सफाई के नाम पर केवल खानापूर्ति
शहर के जागरूक नागरिकों का कहना है कि इछावर में सफाई के नाम पर केवल कागजी औपचारिकता निभाई जा रही है। वार्डों के कोनों में कचरे के ढेर लगे हैं, जिससे अब इलाके में संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा तेजी से मंडरा रहा है। जनता अब खुलकर यह पूछ रही है कि अगर मानसून से निपटने की व्यवस्था इतनी ही चाक-चौबंद थी तो पहली ही बौछार में शहर का यह हाल क्यों हो गया। स्वच्छता के नाम पर जो लाखों का बजट स्वीकृत हुआ, वह धरातल पर दिखने के बजाय किसकी जेब में चला गया। नागरिकों ने मांग की है कि मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने से पहले युद्धस्तर पर नालियों की सफाई कराई जाए।

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