
सीहोर। दिव्यांग कल्याण एवं विकास परिषद की महत्वपूर्ण बैठक 13 सितंबर को भोपाल में आयोजित की गई। बैठक में परिषद के राष्ट्रीय एवं प्रदेश पदाधिकारियों के साथ विभिन्न जिलों के जिलाध्यक्ष एवं दिव्यांग प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में दिव्यांगजनों की समस्याओं और अधिकारों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान दिव्यांगजन आयुक्त डॉ. अजय खेमरिया एवं राज्य दिव्यांग आयोग के सदस्य राजेश शुक्ला के समक्ष जिलेवार समस्याएं रखी गईं तथा सरकार से 10 सूत्रीय मांगों को पूरा करने की मांग की गई। बैठक में आमंत्रित दिव्यांगजन आयुक्त डॉ. अजय खेमरिया ने दिव्यांगजनों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और उनके निराकरण के संबंध में आवश्यक मार्गदर्शन दिया। उन्होंने पदाधिकारियों से कहा कि दिव्यांगजन अपनी समस्याएं लिखित रूप में प्रस्तुत करें, जिन पर उनके स्तर से तत्काल कार्रवाई की जाएगी। वहीं राज्य दिव्यांग आयोग के सदस्य राजेश शुक्ला ने शासन द्वारा दिव्यांगजनों के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी तथा जिलेवार सामने आई समस्याओं को शासन स्तर पर निराकृत कराने का आश्वासन दिया।
ये उठाई प्रमुख मांगें-
– परिषद ने दिव्यांग छात्र-छात्राओं के लिए डिग्री, डिप्लोमा, इंजीनियरिंग, मेडिकल, बीएड और डीएड सहित उच्च शिक्षा निःशुल्क किए जाने की मांग की। साथ ही विवाहित दिव्यांग व्यक्तियों के बच्चों की शिक्षा भी निःशुल्क करने की मांग रखी गई।
– स्वास्थ्य सुविधाओं के संबंध में सरकारी एवं निजी अस्पतालों में दिव्यांगजनों को निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराने तथा विवाहित दिव्यांग व्यक्तियों के परिवार को भी निःशुल्क चिकित्सा सुविधा का लाभ देने की मांग की गई।
– दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ग्राम पंचायत, नगर परिषद, नगरपालिका एवं नगर निगम द्वारा निर्मित दुकानों में 6 प्रतिशत आरक्षण निर्धारित कर दुकानों का आवंटन करने की मांग की गई। संगठन का कहना है कि इससे दिव्यांगजन स्वयं का व्यवसाय शुरू कर स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बन सकेंगे।
– दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 को प्रभावी रूप से लागू करने, दिव्यांग कल्याण एवं विकास परिषद की भोपाल शाखा के संचालन के लिए भवन उपलब्ध कराने तथा पुनर्वास संस्थानों में दिव्यांगजनों को कर्मचारी के रूप में अवसर देने की मांग की गई। संस्थानों की कैंटीन संचालन का अवसर भी दिव्यांगजनों को दिए जाने की मांग ज्ञापन में शामिल रही।
– विशेष भर्ती अभियान के तहत दिव्यांगजनों की भर्ती प्रक्रिया को उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार पूरी तरह ऑनलाइन किए जाने की मांग की गई। संगठन ने कहा कि रुकी हुई भर्ती प्रक्रिया को दोबारा ऑनलाइन शुरू किया जाए, ताकि प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और भ्रष्टाचार की संभावनाओं को कम किया जा सके।
– प्रत्येक जिले में दिव्यांगजनों का वर्गवार सर्वे कराकर उनकी शैक्षणिक योग्यता के अनुसार रोजगार एवं नौकरी उपलब्ध कराने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। साथ ही 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले दिव्यांगजनों को जिला कलेक्टर के माध्यम से पेट्रोल चलित वाहन उपलब्ध कराने की मांग की गई, जिससे वे स्वरोजगार शुरू कर अपनी आजीविका चला सकें।
संगठन को मजबूत बनाने पर दिया जोर-
परिषद ने सरकार से 10 सूत्रीय मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है। संगठन का कहना है कि दिव्यांगजनों को केवल सहायता नहीं, बल्कि समान अवसर, सम्मान और आत्मनिर्भर बनने का अधिकार मिलना चाहिए।