भैंस के आगे न्याय की गुहार, पार्वती नदी में किसानों का जल सत्याग्रह तीसरे दिन भी जारी

विद्युत मंडल अफसरों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग पर अड़े किसान, 25 से अधिक गांवों के ग्रामीण आंदोलित

सीहोर। बिजली कंपनी की कथित लापरवाही और खेतों-मकानों के ऊपर झूलती हाईटेंशन लाइनों से परेशान सीहोर और शाजापुर जिले के किसानों का विरोध-प्रदर्शन उग्र होता जा रहा है। विद्युत मंडल के अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर पार्वती नदी में किसानों का जल सत्याग्रह तीसरे दिन भी जारी रहा। इस दौरान किसानों ने अनूठे और अनोखे अंदाज में विरोध दर्ज कराते हुए गहरे पानी में भैंसों को खड़ा किया और उनके आगे नारेबाजी की। किसानों का कहना था कि जब सरकार और प्रशासन हमारी आवाज नहीं सुन रहे तो हम भैंसों के आगे अपनी फरियाद सुना रहे हैं।
आंदोलनकारी किसानों का आरोप है कि ग्रामीण अंचलों में 11 केवी और एलटी बिजली की लाइनें जानलेवा बनकर झूल रही हैं। इन तारों की चपेट में आने से कई किसान गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं, जबकि कई मवेशियों की अकाल मौत हो चुकी है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में बेतहाशा और गलत बिजली बिल भेजे जाने से भी किसान बेहद त्रस्त हैं।
अधिकारियों पर दर्ज हो एफआईआर
किसानों की मुख्य मांग है कि सीहोर विद्युत मंडल के अधीक्षण यंत्री, कार्यपालन यंत्री और सहायक यंत्री श्यामपुर के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए। किसानों का कहना है कि इन अधिकारियों की लापरवाही के कारण ही लगातार हादसे हो रहे हैं। जब तक जिम्मेदार अफसरों पर मुकदमा कायम नहीं होता, तब तक यह जल सत्याग्रह और आंदोलन समाप्त नहीं होगा।
2 महीने से जारी है आंदोलन
किसान एवं समाजसेवी एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में सीहोर जिले के 25 से अधिक गांवों और शाजापुर जिले के सीमावर्ती गांवों के करीब 500 से अधिक किसान पिछले दो महीनों से लगातार अपनी आवाज उठा रहे हैं। किसानों ने बताया कि वे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, सीहोर जिले की प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर, मानवाधिकार आयोग और महिला आयोग सहित बिजली विभाग के आला अधिकारियों को कई बार ज्ञापन सौंप चुके हैं, लेकिन आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

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