पुलिस पंचायत: 4.5 एकड़ जमीन के विवाद में बेटे-बहू ने मांगी माफी, 12 साल पुराने उधारी मामले में बना अनोखा राजीनामा

सीहोर। पुलिस अधीक्षक सोनाक्षी सक्सेना के निर्देश पर गठित सीनियर सिटीजन पुलिस पंचायत की बैठक आयोजित की गई। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. प्रशांत चौबे तथा कोर कमेटी सदस्य अनिल पालीवाल, कमल सिंह ठाकुर और विपुल चाण्डक की उपस्थिति में सम्पन्न हुई इस बैठक में बुजुर्गों की विभिन्न शिकायतों पर संवेदनशील तरीके से सुनवाई कर उनका निराकरण किया गया।
मामला 1. 4.5 एकड़ जमीन और 6 बच्चों के बीच विवाद, बेटे ने मांगी माफी
मंडी क्षेत्र निवासी 75 वर्षीय बुजुर्ग ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके 4 बेटे और 2 बेटियां हैं। बुजुर्ग के पास 4.5 एकड़ जमीन थी, जिसमें से कुछ हिस्सा एक बेटे को पैसों के एवज में रजिस्ट्री कर दिया गया था, जबकि शेष जमीन पर चारों बेटे अलग-अलग खेती कर रहे हैं। बुजुर्ग माता-पिता के पास खुद की कोई जमीन नहीं बची थी और बेटे केवल राशन देकर गुजारा करा रहे थे। इस दौरान एक बेटे ने पूर्व में पिता के साथ मारपीट व विवाद भी किया था।
सुनवाई के दौरान पुलिस पंचायत ने पिता के साथ मारपीट करने वाले बेटे की कड़ी फटकार लगाई और स्पष्ट किया कि संपत्ति पर अंतिम अधिकार पिता का ही है। पिता अपनी इच्छानुसार वसीयत बदल सकते हैं और सेवा न करने पर बेटे का अधिकार भी समाप्त कर सकते हैं। परामर्श के बाद बेटे को अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने पिता के पैर छूकर आशीर्वाद लिया व भविष्य में विवाद न करने का वचन दिया।
मामला 2. बेटे-बहू के विवाद से तंग थे माता-पिता
पारिवारिक विवाद और मारपीट के एक अन्य मामले में बात एफआईआर तक पहुंच गई थी। बुजुर्ग माता-पिता ने बेटे-बहू से खुद को खतरा और तनाव होने की बात कही थी। पुलिस पंचायत ने दोनों पक्षों को सुना और समझाया कि बीती बातों को भूलकर भविष्य को सुधारा जा सकता है। पंचायत की समझाइश पर बेटे और बहू ने बुजुर्गों के पैर छूकर माफी मांगी और आगे से आदर-सम्मान के साथ रहने का संकल्प लिया।
मामला 3. आस्था स्थल पर शपथ से होगा फैसला
देहात क्षेत्र के 80 वर्षीय बुजुर्ग ने शिकायत की थी कि उन्होंने 12 साल पहले एक व्यक्ति को 15 हजार रुपये उधार दिए थे, जो वापस नहीं मिले। वहीं दूसरे पक्ष का दावा था कि वह मूल से ज्यादा रकम लौटा चुका है। गवाहों के बावजूद स्थिति साफ न होने पर पंचायत ने नैतिक रास्ता निकाला। दोनों पक्षों की सहमति से तय हुआ कि अनावेदक एक महीने के भीतर यह राशि किसी पवित्र आस्था स्थल पर रखेगा। यदि आवेदक सच बोल रहे हैं तो वे राशि उठा लेंगे और यदि दूसरा पक्ष सही है तो वह शपथपूर्वक घोषणा करेगा। इस अनोखी व्यवस्था पर दोनों पक्षों में राजीनामा हो गया।
बुजुर्गों के लिए नि:शुल्क परिचय पत्र सेवा
पुलिस पंचायत की ओर से बताया गया कि 60 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी वरिष्ठ नागरिक पुलिस कार्यालय में एक नि:शुल्क फॉर्म भरकर और अपनी आयु प्रमाण पत्र जैसे आधार कार्ड की फोटोकॉपी जमा करके सीनियर सिटीजन परिचय पत्र प्राप्त कर सकता है। इस परिचय पत्र के माध्यम से बुजुर्गों को विभिन्न सेवाओं और संस्थानों में छूट दिलाने के लिए कई संस्थाएं पुलिस प्रशासन के संपर्क में आई हैं।



