बुधनी में 28 को सियासी घमासान, गेहूं खरीदी और बोनस के मुद्दे पर घेरेगी कांग्रेस

सीहोर। मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी और किसानों की समस्याओं को लेकर सियासत का पारा चढ़ गया है। कांग्रेस ने अब भाजपा के सबसे मजबूत किले यानी पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के क्षेत्र बुधनी में महा-आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। आगामी 28 अप्रैल को बुधनी में कांग्रेस एक विशाल प्रदर्शन करने जा रही है, जिसमें किसानों की आय, एमएसपी पर बोनस और सरकारी नीतियों के खिलाफ हुंकार भरी जाएगी।
इस महा-आंदोलन की तैयारियों को लेकर बुधवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में हलचल तेज रही। किसान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व विधायक धर्मेन्द्र सिंह चौहान ने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार से मुलाकात की। चौहान ने सिंघार को इस आंदोलन का नेतृत्व करने और इसमें शामिल होने का औपचारिक आग्रह किया।
बता दें कि बीते दिनों सीहोर जिला मुख्यालय पर हुए प्रदर्शन के दौरान उमंग सिंघार के बेहद आक्रामक तेवर देखने को मिले थे। सीहोर के स्थानीय नेताओं का मानना है कि दशकों बाद किसी प्रादेशिक नेता ने जिले में इतनी मजबूती और तीखेपन के साथ सरकार को घेरा है। अब वही तेवर बुधनी की धरती पर दोहराने की तैयारी है।
किन मुद्दों पर घेरेगी कांग्रेस
किसान कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार किसानों की अनदेखी और उनका उत्पीडऩ कर रही है। आंदोलन के मुख्य बिंदु निम्न होंगे, जिनमें खरीदी केंद्रों पर बारदाने की कमी और किसानों को हो रही परेशानी। चुनाव पूर्व किए गए 2700 प्रति क्विंटल के वादे को तुरंत पूरा करने की मांग। लागत बढऩे और उपज का सही दाम न मिलने के कारण किसानों की बदहाली।
शिवराज के गढ़ में कांग्रेस की सर्जिकल स्ट्राइक
बुधनी लंबे समय से भाजपा और विशेषकर शिवराज सिंह चौहान का अभेद्य दुर्ग रहा है। ऐसे में कांग्रेस का यहां महा-आंदोलन करना सीधे तौर पर सत्ता पक्ष को चुनौती देने की रणनीति का हिस्सा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस इस आंदोलन के जरिए न केवल किसानों की आवाज उठाना चाहती हैं, बल्कि आगामी राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए बुधनी में कांग्रेस की जड़ों को भी मजबूत करना चाहती हैं।
धर्मेंद्र सिंह चौहान का कड़ा रुख
मुलाकात के बाद धर्मेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि भाजपा सरकार ने किसानों को केवल विज्ञापनों में खुशहाल दिखाया है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि किसान अपनी उपज बेचने के लिए दर-दर भटक रहा है। 28 अप्रैल का यह आंदोलन सोती हुई सरकार को जगाने का काम करेगा।

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