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भोग प्रसादम् पर सियासत… अब कांग्रेस ने मांगा मंदिर समिति से लड्डू की अशुद्धता का प्रमाण-पत्र

- कांग्रेस बोली यदि मंदिर समिति ने बेचने देगी भोग प्रसादम् तो कांग्रेस पार्टी बेचेगी

सीहोर। जिले के प्रसिद्ध तीर्थ सलकनपुर स्थित मां बिजासन धाम पर मिलने वाले सलकनपुर भोग प्रसादम् की बिक्री एवं शुद्धता को लेकर मंदिर समिति द्वारा दिए गए कलेक्टर-एसपी को पत्र के बाद से अब इस पर राजनीति भी शुरू हो गई है। मंदिर समिति ने अपने पत्र में सलकनपुर भोग प्रसादम् में अजीब सी महक का जिक्र किया है, जिस पर अब कांग्रेस ने भी सवाल उठाया है। कांग्रेस ने मंदिर समिति से भोग प्रसादम की जांच के प्रमाण भी मांगे हैं। सलकनपुर भोग प्रसादम् बनाने वाले समूह द्वारा हर 6 माह में यहां के लड्डुओं की जांच कराई जाती है, लेकिन अब कांग्रेस ने मंदिर समिति से इसके प्रमाण मांगे हैं। कांग्रेस नेता एवं सलकनपुर मंदिर समिति के वर्ष 1991 से 1994 तक अध्यक्ष रहे ठाकुर मंगल सिंह एवं कांग्रेस नेता विक्रम मस्ताल शर्मा ने कहा कि मंदिर समिति भोग प्रसादम की अशुद्धता के प्रमाण प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि यदि मंदिर समिति लड्डुओं की बिक्री पर रोक लगाएगी तो यह लड्डु कांग्रेस पार्टी द्वारा बिकवाए जाएंगे। कांग्रेस नेताओं ने मालीबायां स्थित केंद्र का भी निरीक्षण किया एवं स्व-सहायता समूह की महिलाओं से चर्चा की।

मंदिर समिति ने दिया था तर्क, आती है अजीब सी महक –
सलकनपुर भोग प्रसादम् के रूप में दिए जा रहे लड्डुओं पर सलकनपुर मंदिर समिति ने सवाल उठाते हुए कहा था कि सलकनपुर मंदिर प्रांगण में बेचे जा रहे लड्डुओं से अजीब सी महक आती है। इस संबंध में समिति ने पिछले दिनों जिला कलेक्टर प्रवीण सिंह एवं एसपी मयंक अवस्थी को लिखित आवेदन भी सौंपा था। मंदिर समिति ने आवेदन में बताया कि सलकनपुर मंदिर परिसर में मंदिर का मोनो लगाकर स्व-सहायता समूह द्वारा प्रसाद के रूप में बेचे जा रहे लड्डुओं की गुणवत्ता की कोई गारंटी नहीं है। लड्डुओं मेें किस तरह की निर्माण सामग्री का उपयोग किया जा रहा है, इस पर किसी भी जांच लैब का कोई प्रमाणीकरण नहीं है। इसके संबंध में अनेक बार दर्शनार्थियों ने खरीदे गए प्रसाद की अध्यक्ष एवं ट्रस्ट समिति से शिकायत भी की है। शिकायत में बताया कि लड्डुओं से अजीब सी महक आती है। इस संबंध में लड्डू बेचने वालों से समिति ने कहा है कि किसी भी बाहरी संस्था द्वारा मंदिर प्रांगण में मंदिर का मोनो लगाकर लड्डू बेचना प्रतिबंधित है, इसलिए मंदिर प्रांगण में लड्डू बेचना तत्काल बंद किया जाए। मंदिर का मोनो लगा होने के कारण घटिया सामग्री संदर्भ में लड्डू बेचना मंदिर की प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ मामला है। मंदिर समिति ने कलेक्टर प्रवीण सिंह एवं एसपी मयंक अवस्थी से निवेदन किया है कि किसी तरह की खराब क्वालिटी के कारण मंदिर की प्रतिष्ठा पर आंच आए, उससे पहले मंदिर प्रांगण में मंदिर का मोनो लगाकर बेचे जा रहे लड्डुओं के प्रसाद को प्रतिबंधित किया जाए।

कांग्रेस बेचेगी भोग प्रसादम् के लड्डू, महिलाओं का नहीं होने देंगे नुकसान: विक्रम मस्ताल शर्मा
कांग्रेस के युवा नेता विक्रम मस्ताल शर्मा ने कहा है कि सलकनपुर भोग प्रसादम् को लेकर कोरी अफवाह फैलाई गई है। किसी ने भी कोई जांच नहीं कराई है। इस कोरी अफवाह के कारण भोग प्रसादम् केंद्र की बिक्री पर भी असर पड़ेगा। महिला स्व-सहायता समूह द्वारा बेहतर कार्य किया जा रहा है, लेकिन मंदिर समिति नहीं चाहती कि महिलाएं यहां पर लड्डू बेचे। सलकनपुर भोग प्रसादम् द्वारा बेचे जा रहे लड्डुओं की यदि मंदिर समिति ने कोई जांच कराई हो तो वह रिपोर्ट सार्वजनिक करें। हवा में तीर नहीं चलाएं। उन्होंने कहा कि यदि मंदिर समिति लड्डुओं की बिक्री पर प्रतिबंध लगाएगी तो कांग्रेस पार्टी इन लड्डुओं को बेचेगी। महिलाओं का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष ठाकुर मंगल सिंह ने कहा कि मंदिर समिति द्वारा जिस तरह से भोग प्रसादम् पर सवाल उठाए गए हैं वह उचित नहीं हैैं। मंदिर में वर्षों से लड्डुओं की बिक्री की जाती है। पहले राजगीरा सहित अन्य प्रकार के लड्डू बेचे जाते थे, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से बेसन के लड्डुओं की बिक्री भी शुरू कराई गई थी, जिसे अब समिति बंद करवाने में लगी हुई है। कांग्रेस नेता एवं रेहटी ब्लॉक के अध्यक्ष प्रेमनारायण गुप्ता ने कहा कि एक तरफ मंदिर समिति भ्रष्टाचार करने में लगी हुई है तो दूसरी तरफ महिला स्व-सहायता समूह द्वारा बेहतर कार्य किया जा रहा है, जिसको वे बंद कराना चाहते हैं।

मंदिर के बाहर स्टॉल लगाकर बेचेंगे भोग प्रसादम् –

भोग प्रसादम् बनाने वाले महिला स्व-सहायता समूह की प्रमुख रजनी मेहरा ने बताया कि अब लड्डुओं को बेचने का कार्य मंदिर परिसर से बाहर स्टॉल लगाकर किया जाएगा। साथ ही लड्डुओं के पैकेट पर मंदिर का लगा मोनो भी हटाया जाएगा। मंदिर समिति ने आश्वासन दिया है कि नवरात्रि के बाद वे कोई बेहतर व्यवस्था कर देंगे।

 

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Quasi tutti pubblicano senza definire una voce personale, rendendo il blog indistinguibile. Capire come costruirla merita un'analisi più approfondita. scambiò il dolore per un infortunio Da fuori sembra tutto semplice, quasi spontaneo, ma dietro ogni blog c'è un piccolo mondo da costruire. Bastano una voce sincera e qualche idea per far tornare chi legge.