
सीहोर। भाई-बहन के पवित्र प्रेम, समर्पण और अटूट विश्वास का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व और धार्मिक अनुष्ठान श्रावणी उपाकर्म इस वर्ष शुक्रवार 28 अगस्त को जिले भर में पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। पंडित सुनील शर्मा के अनुसार पूर्णिमा तिथि उदया तिथि में शतभिषा नक्षत्र के शुभ संयोग में पड़ रही है। सबसे खास बात यह है कि इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहेगा, जिससे बहनें पूरा दिन बिना किसी अड़चन के भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांध सकेंगी।
पंडित सुनील शर्मा ने बताया कि श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह 9.11 बजे से प्रारंभ होगी, जो 28 अगस्त को सुबह 9.50 बजे पूर्ण होगी। शास्त्रों के अनुसार उदया तिथि मान्य होने के कारण रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त को ही मनाया जाएगा। शुक्रवार को सुबह सर्वप्रथम देवी-देवताओं और श्रवण पूजन के पश्चात बहनें अपने भाइयों को मंगल तिलक लगाकर रक्षासूत्र बांधेंगी और उनके यशस्वी व सुख-समृद्ध जीवन की कामना करेंगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस पूर्णिमा पर पडऩे वाला चंद्रग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा।
विप्र बंधु करेंगे नवीन यज्ञोपवीत धारण
श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर सनातन परंपरा के अनुसार ब्राह्मण समाज द्वारा श्रावणी उपाकर्म का आयोजन किया जाएगा। विप्रजनों के लिए यह पर्व आत्म शुद्धि, स्वाध्याय और ज्ञान-साधना के प्रति पुन: समर्पित होने का दिव्य अवसर माना गया है।
हेमाद्रि संकल्प और दसविधि स्नान
अनुष्ठान का शुभारंभ जिले की पवित्र नदियों, सरोवरों और तालाबों के तट पर हेमाद्रि संकल्प के साथ होगा। इसके तहत विप्र बंधु भस्म, मिट्टी, सप्त औषधि, पंचगव्य दूध, दही, घी, गोबर, गोमूत्र, दूर्वा, कुशा, फल और तीर्थ जल जैसे विशेष द्रव्यों से शास्त्रीय दसविधि स्नान करेंगे। इसके बाद देव, ऋषि और पितरों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए तर्पण किया जाएगा। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शिव परिवार, माता गायत्री और सप्तऋषियों का पूजन व हवन संपन्न होगा। तत्पश्चात विप्रजन पुराने यज्ञोपवीत का त्याग कर माता गायत्री का ध्यान करते हुए नवीन यज्ञोपवीत धारण करेंगे।