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सीहोर के शरबती गेहूं का बजा डंका, मप्र के 27 उत्पादों को मिला जीआई टैग

सीहोर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकल फॉर लोकल के सपने को साकार करते हुए मध्य प्रदेश ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश की पारंपरिक शिल्प कलाओं, कृषि और बागवानी उत्पादों को अब तक कुल 27 प्रतिष्ठित जीआई टैग प्राप्त हो चुके हैं। सीहोर जिले के लिए गर्व की बात यह है कि यहां के विश्व प्रसिद्ध शरबती गेहूं को भी इस खास सूची में स्थान मिला है, जिससे स्थानीय किसानों को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी फसल की प्रामाणिकता और सही दाम मिल सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस सफलता पर प्रदेश के किसानों, शिल्पकारों और उद्यमियों को बधाई देते हुए कहा कि यह पहचान हमारे पारंपरिक हुनर और प्राकृतिक संपदा का सम्मान है।
क्या है सीहोर का गौरव, शरबती गेहूं
सीहोर और विदिशा क्षेत्र में पैदा होने वाला शरबती गेहूं अपनी चमक, मिठास और स्वाद के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। जीआई टैग मिलने के बाद अब कोई भी अन्य क्षेत्र इस नाम का दुरुपयोग नहीं कर सकेगा। इससे सीहोर के किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और बिचौलियों से मुक्ति मिलेगी।
2024 और 2025 की विशेष उपलब्धियां
बता दें पिछले दो वर्षों में मध्य प्रदेश ने जीआई टैग के मामले में लंबी छलांग लगाई है….
वर्ष 2024: बुंदेलखंड के कठिया गेहूं और जावरा रतलाम के लहसुन को यह दर्जा मिला।
वर्ष 2025: इस साल 5 नए उत्पादों ने सूची में जगह बनाई, जिनमें खजुराहो का स्टोन क्राफ्ट, बैतूल का भरेवा मेटल क्राफ्ट, छतरपुर का पारंपरिक फर्नीचर और ग्वालियर का पत्थर शिल्प व पेपर मैश क्राफ्ट शामिल हैं।
इन उत्पादों को भी मिल चुकी है पहचान
प्रदेश की इस प्रतिष्ठित सूची में सीहोर के गेहूं के अलावा चंदेरी और महेश्वरी साड़ी, इंदौर के चमड़े के खिलौने, धार का बाग प्रिंट, झाबुआ का कडक़नाथ मुर्गा, रतलाम की सेव, मुरैना की गजक, सुंदरजा आम रीवा और चिन्नौर चावल बालाघाट जैसे उत्पाद शामिल हैं।
क्या होता है जीआई टैग
जीआई टैग यानी भौगोलिक संकेत किसी उत्पाद की गुणवत्ता और उसकी विशिष्ट उत्पत्ति के स्थान को प्रमाणित करता है। यह केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा प्रदान किया जाता है। एक बार पंजीकरण होने के बाद इसकी वैधता 10 वर्ष तक रहती है, जिसे बाद में नवीनीकरण कराया जा सकता है। भारत में सबसे पहला जीआई टैग साल 2004 में दार्जिलिंग चाय को मिला था।

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