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साहब! वन और बड़े घास की भूमि पर काबिज किसानों को नहीं मिल रहा खाद

ई-टोकन प्रणाली बनी मुसीबत, फसलें खराब होने की कगार पर

सीहोर। मध्य प्रदेश सरकार की ई-टोकन व्यवस्था के चलते रेहटी तहसील अंतर्गत ग्राम जाजना के किसानों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। ग्राम सांवलसोड़ा के सरपंच और क्षेत्र के दर्जनों प्रभावित किसानों ने कलेक्टर के नाम आवेदन सौंपकर वन भूमि और बड़े घास की भूमि पर काबिज कृषकों को खाद उपलब्ध कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि खाद न मिलने के कारण उनकी फसलें नष्ट होने की कगार पर पहुंच गई हैं।
कलेक्टर को सौंपे गए शिकायती पत्र में ग्राम जाजना के किसान रामराज, बालकृष्ण, शेरसिंह, भगवान सिंह, प्रभुसिंह सहित अन्य ने बताया कि वे लंबे समय से ग्राम म_ागांव स्थित वन भूमि और बड़े घास की सरकारी भूमि पर काबिज होकर खेती करते आ रहे हैं। इस भूमि से होने वाली उपज से ही उनके परिवारों का भरण-पोषण होता है। इस काबिज भूमि का सरकारी स्तर पर सीमांकन भी किया जा चुका है।
किसानों ने बताया कि परेशानी तब शुरू हुई जब सरकार द्वारा खाद वितरण के लिए ई-टोकन प्रणाली अनिवार्य कर दी गई। इस नई व्यवस्था के तहत वर्तमान में केवल पट्टे या स्वयं के स्वामित्व वाली भूमि के धारकों को ही खाद का वितरण किया जा रहा है। चूंकि ये किसान वन और सरकारी घास की भूमि पर काबिज हैं, इसलिए इन्हें इस सिस्टम के तहत खाद नहीं मिल पा रही है।
फसलें हो रही हैं नष्ट
किसानों का कहना है कि बोनी के बाद अब फसलों को खाद की सख्त जरूरत है। समय पर खाद का छिडक़ाव न होने से खेतों में खड़ी फलें खराब हो रही हैं, जिससे किसानों की मेहनत और पूंजी डूबने का खतरा पैदा हो गया है।
किसानों ने कलेक्टर से गुहार लगाई है कि काबिज भूमि के आधार पर उन्हें खाद खरीदने के लिए तुरंत वैकल्पिक और समुचित व्यवस्था कराई जाए। राजस्व रिकॉर्ड में मौके की स्थिति के अनुसार भूमि का नक्शा दुरुस्त करने के आदेश पारित किए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी तकनीकी समस्या न आए। ज्ञापन सौंपने वालों में रामराज, बालकृष्ण, शेरसिंह, अमृतलाल, मिश्रीलाल कोर, उधम सिंह, भगवान सिंह, प्रभुसिंह, अखिलेश, रामदीन, मंगलसिंह, सीताराम, अनूप सिंह, भंवर सिंह, बलवान सिंह और प्रताप सहित ग्राम के समस्त किसान शामिल रहे।

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