संडे का सुकून ने 450 बच्चों के संग मनाई सुकून की दिवाली

पुलिस अधिकारी और अर्जुन अवॉर्डी कपिल परमार भी हुए शामिल

सीहोर। खुशियां बांटने से बढ़ती हैं और त्योहारों की असली सार्थकता तभी है, जब उनकी खुशियों में समाज का हर वर्ग शामिल हो। इसी मानवीय सोच के साथ शहर की सामाजिक संस्था संडे का सुकून ने लगातार नौवें वर्ष वंचित और जरूरतमंद बच्चों के साथ दीपावली का पर्व बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाया। इस अनूठी पहल का उद्देश्य उन बच्चों तक त्योहार की खुशियां पहुंचाना था, जो आर्थिक तंगी के चलते इन आनंद से वंचित रह जाते हैं।
इस वर्ष का आयोजन कई मायनों में बेहद खास रहा, जिसमें करीब 450 बच्चों ने हिस्सा लिया। हर साल की तरह इस बार भी बच्चों को संस्था की टीम का बेसब्री से इंतजार था। बच्चों के लिए पढ़ाई और खेलकूद से जुड़ी उपयोगी सामग्री उपहार स्वरूप लाई गई थी। जैसे ही बच्चों को ये उपहार मिले, उनके चेहरे खुशी से खिल उठे। बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ हम स्टूडेंट लव यू संडे का सुकून कहकर संस्था के प्रति अपना अनोखा प्यार जताया।
पुलिस अधिकारी भी हुए शामिल
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में एडिशनल एसपी डॉ. प्रशांत चौबे, सीएसपी अभिनंदना शर्मा पैरालंपिक पदक विजेता एवं अर्जुन अवॉर्डी कपिल परमार, सूबेदार प्राची राजपूत शामिल रहे। अतिथियों ने बच्चों का हौसला बढ़ाते हुए भरोसा दिलाया कि जरूरत पडऩे पर वे हमेशा उनके साथ खड़े हैं। इस दौरान एडिशनल एसपी डॉ. प्रशांत चौबे ने बच्चों और वहां मौजूद सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स से अपील की कि वे पर्यावरण और सेहत के लिए हानिकारक पटाखों का उपयोग न करें और एक सुरक्षित व इको फ्रेंडली दिवाली मनाएं।
अर्जुन अवॉर्डी कपिल ने साझा की अपनी कहानी
पैरालंपिक पदक विजेता व अर्जुन अवॉर्डी कपिल परमार ने बच्चों के साथ आत्मीय संवाद किया और अपने जीवन के संघर्ष, कड़ी मेहनत व सफलता की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि कैसे कठिन परिस्थितियों के बावजूद दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयास से अपने लक्ष्य को पाया जा सकता है।
गोरिल्ला डांस रहे आकर्षण का केन्द्र
इस बार के आयोजन में प्रदेश के कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने भी उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। उन्होंने बच्चों के साथ वक्त बिताया और उन्हें स्नेह व प्रोत्साहन दियाए जिससे सोशल मीडिया को सामाजिक सरोकारों से जोडऩे का एक बेहतरीन संदेश गया। इसके अलावा बच्चों के मनोरंजन के लिए भीम और गोरिल्ला के आकर्षक डांस ने खूब लोटपोट किया। अंत में स्वादिष्ट नाश्ते की व्यवस्था ने इस आयोजन की रौनक में चार चांद लगा दिए।
9 सालों से चली आ रही परंपरा
बता दें पिछले नौ वर्षों से लगातार आयोजित हो रही सुकून की दिवाली अब केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, सामाजिक सहभागिता और इंसानियत की एक खूबसूरत परंपरा बन चुकी है। संस्था की यह पहल समाज को यह संदेश देती है कि दीयों की रोशनी तभी सार्थक है, जब उसकी चमक हर बेसहारा और जरूरतमंद के चेहरे तक पहुंचे।

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