देलावाड़ी रेंज ने पकड़ी दो गाड़ी, एक पर लिखा था आरटीओ, आरोपी भी पकड़ाए
- गाड़ियों में मिली सागौन की सिल्लियां

सीहोर। लकड़ी माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि वे पुलिस और वन विभाग की टीम को चकमा देने के लिए नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं। ताजा मामला सीहोर जिले के देलावाड़ी वन परिक्षेत्र का है, जहां तस्करों ने जांच वन अमले की आंखों में धूल झोंकने के लिए एक कार पर आरटीओ (परिवहन विभाग) की प्लेट लगा रखी थी। इस गाड़ी के साथ ही एक कार भी जप्त की गई है। आरोपियों द्वारा दोनों गाड़ियों के जरिए अवैध रूप से कीमती सागौन की लकड़ी का परिवहन किया जा रहा था। हालांकि वन विभाग की मुस्तैदी के कारण तस्करों का यह हाईटेक प्लान फेल हो गया और विभाग ने गाड़ी एवं आरोपियों सहित कीमती लकड़ी जब्त कर ली।
जानकारी के अनुसार देलावाड़ी वनपरिक्षेत्र अधिकारी प्रशांत खरे के नेतृत्व में विभाग की टीम ने पद्यश्री डॉ व्हीएस वाकणकर रातापानी टाइगर रिजर्व परिक्षेत्र देलावाड़ी में सागौन का अवैध परिवहन करते हुए दो वाहनों को पकड़ा है। यह क्षेत्र रायसेन जिले के वन विभाग अंतर्गत आता है, लेकिन यहां पर सीहोर जिले की सीमा भी है। यह जंगल आमडो क्षेत्र कहलाता है। यहां पर वन परिक्षेत्र देलावाड़ी की टीम द्वारा गश्ती की जा रही थी, तभी विभाग की टीम को क्षेत्र में दो संदिग्ध वाहन की आवाजाही की सूचना मिली थी। जब टीम ने वाहनों को देखा तो उस पर आरटीओ लिखा हुआ था, ताकि कोई उसे रोकने की हिम्मत न करे। वाहनों की गतिविधियों को देखकर वन विभाग की टीम को शक हुआ, जिसके बाद टीम ने गाड़ियों को रोककर पूछताछ की तो मामला उजागर हो गया। इस बार वन विभाग की टीम ने गाड़ियों के साथ ही उसमें रखी सागौन की सिल्लियां एवं आरोपियों सुरेश पिता कान्हा बारेला निवासी सुरई ढाबा, अर्पित यादव पिता शारदा प्रसाद यादव निवासी मालाखेड़ी, नीलेश यादव पिता छोटेलाल यादव निवासी मालाखेड़ी एवं सोहेल शेख पिता नासिर शेख निवासी मालाखेड़ी को भी पकड़ा है।
होशंगाबाद पासिंग गाड़ी से कर रहे अवैध लकड़ी का परिवहन-
मामले की पुष्टि करते हुए देलावाड़ी वन परिक्षेत्र अधिकारी प्रशांत खरे ने बताया कि वन विभाग की टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए आमडो के पास घेराबंदी कर दो गाड़ियों को पकड़ा है। जब गाड़ियोें की तलाशी ली गई तो उसके भीतर से भारी मात्रा में अवैध सागौन की कीमती सिल्लियां बरामद हुईं। रेंज अधिकारी ने बताया कि पकड़ी गई गाड़ी होशंगाबाद पासिंग की है। तस्करों ने वन विभाग और पुलिस को भ्रमित करने के लिए गाड़ी पर आरटीओ की प्लेट लगा रखी थी, ताकि नाकों और चेकिंग पॉइंट पर उन्हें कोई न रोके।



