सलकनपुर में जल गंगा संवर्धन अभियान बना खानापूर्ति, जिलेभर में हुआ 2555 चेक डैमों का निर्माण

- सलकनपुर स्थित तालाबों में नहीं हुआ काम, एक का होना था गहरीकरण, दूसरे की होनी थी साफ-सफाई

सीहोर। जिलेभर में चल रहे जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत जलस्त्रोतों को जीवित करने का कार्य हो रहा है, लेकिन सलकनपुर स्थित तालाब में यह अभियान सिर्फ खानापूर्ति बनकर रह गया है। इसके कारण गांव से लगे हुए तालाब का गहरीकरण कार्य भी नहीं हुआ। तालाब गहरीकरण के लिए ग्राम पंचायत द्वारा रेलवे को अनुमति भी दी गई थी। इसके बाद रेलवे ने तालाब के कुछ हिस्से में खुदाई की, लेकिन बाद में इसे बंद कर दिया गया। अब ग्रामीणों द्वारा मांग उठाई जा रही है कि तालाब का गहरीकरण कार्य होना चाहिए, जिससे उन्हें गर्मी के दिनों में पर्याप्त पानी मिल सके। तालाब के कारण गांव के जलस्त्रोत भी जीवित रहते हैं। बताया जा रहा है कि सलकनपुर मंदिर समिति और ग्राम पंचायत सलकनपुर के बीच में छिड़े शीत युद्ध के कारण यह स्थिति बनी है। अधिकारियों ने रेलवे को काम करने के लिए मना कर दिया है।
कलेक्टर के निर्देश सलकनपुर में बे-असर-
कलेक्टर बालागुरु के. के निर्देश पर जिलेभर में जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जल संरक्षण, जल स्रोतों के पुनर्जीवन एवं जन-जागरूकता से जुड़े कार्यों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की गई हैं, लेकिन सीहोर जिले में अभियान के तहत दिए गए कलेक्टर के निर्देश बेअसर साबित हुए हैं। यहां पर तालाब का गहरीकरण कार्य भी नहीं हुआ तो वहीं एक अन्य तालाब की साफ-सफाई भी नहीं की गई है। अभियान के तहत जिले में चेक डैम निर्माण, तालाब निर्माण एवं गहरीकरण, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, जल गुणवत्ता परीक्षण, पौधरोपण, पाइपलाइन सुधार, प्याऊ स्थापना तथा जल स्रोतों के संरक्षण जैसे कार्य बड़े स्तर पर किए गए हैं। साथ ही जल चौपाल, जागरूकता रैली, वृक्ष पूजन, जल स्रोत पूजन एवं विभिन्न जन-जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से आमजन, युवाओं एवं विद्यार्थियों को जल संरक्षण के प्रति प्रेरित किया गया। जिले में जल संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में किए जा रहे इन कार्यों से न केवल जल स्रोतों का संवर्धन हो रहा है, बल्कि आमजन में पानी बचाने एवं जल संरचनाओं के संरक्षण के प्रति सकारात्मक जागरूकता भी बढ़ रही है।
इतने हुए अभियान के तहत कार्य-
अभियान के तहत जिले में 2555 चेक डैम निर्माण, 10 तालाब निर्माण, 17 सौसर निर्माण, 4 तालाब गहरीकरण तथा 24,130 मीटर कंटूर ट्रेंच कार्य लक्ष्य के अनुरूप पूर्ण किए गए हैं। इसके साथ ही 72 पोषण वाटिकाएं एवं 72 रेन वाटर हार्वेस्टिंग कार्य भी पूर्ण किए गए। स्कूलों में 1553 तथा आंगनवाड़ियों में 829 जल गुणवत्ता परीक्षण कार्य शत-प्रतिशत पूरे किए गए। वहीं 54 पंप ऑपरेटरों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। जल ग्रहण संरचनाओं को अतिक्रमण मुक्त कराने के लक्ष्य के विरुद्ध 64 कार्य पूर्ण किए गए, जो निर्धारित लक्ष्य से कहीं अधिक हैं। अभियान के अंतर्गत नगरीय निकायों में महत्वपूर्ण स्थानों पर 52 प्याऊ स्थापित किए गए तथा अमृत योजना अंतर्गत 900 के लक्ष्य के विरुद्ध 3286 हाउस होल्ड कनेक्शन प्रदान किए गए। अभियान के दौरान नाले-नालियों की साफ-सफाई एवं सौंदर्यीकरण के 135 कार्य, जल गुणवत्ता परीक्षण के 411 कार्य तथा पाइपलाइन लीकेज सुधार के 197 कार्य पूर्ण किए गए। 181 हेल्पलाइन पर प्राप्त दूषित पेयजल एवं सीवरेज संबंधी 74 शिकायतों का भी निराकरण किया गया। जन-जागरूकता गतिविधियों में भी जिले ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। वृक्ष पूजन के 103, जल स्रोत पूजन के 79, जल चौपाल एवं जल संवाद के 143 तथा जल मंदिर स्थापना के 83 कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसके अलावा युवाओं एवं नागरिकों को जल संरक्षण से जोड़ने के लिए अनेक रैलियां, प्रतियोगिताएं एवं जनसहभागिता कार्यक्रम आयोजित किए गए। अभियान की इन उपलब्धियों से जिले में जल संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ी है तथा जल स्रोतों के संरक्षण एवं संवर्धन को नई मजबूती मिली है।
इनका कहना है-
जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत कलेक्टर महोदय के निर्देश पर जगह-जगह कार्य किए गए हैं। ग्राम पंचायत सलकनपुर में भी गांव से लगे हुए तालाब की खुदाई के लिए ग्राम पंचायत द्वारा अनुमति प्रदान की गई थी। गहरीकरण भी हुआ है। बाद में उसे क्यों रोका गया है, इसकी जानकारी लेकर बताउंगी।
– सुप्रिया डुफारे, प्रभारी सीईओ, जनपद पंचायत बुधनी

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