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ग्राम पंचायत मांजरकुई के उपसरपंच पति ने 4 लाख में रेलवे से कर लिया तालाब का सौदा!

अवैध उत्खनन, मनमानी एवं भ्रष्टाचार को लेकर कलेक्टर से हुई शिकायत, जल्द ही कार्रवाई का आश्वासन 

सीहोर। जिले की रेहटी तहसील में अवैध उत्खनन एवं जनप्रतिनिधियों की मनमानी इस कदर चल रही है कि वे सार्वजनिक स्थानों, तालाबों की भी बोलियां लगाकर अपना पेट भर रहे हैं। ऐसा ही मामला रेहटी तहसील की ग्राम पंचायत मांजरकुई का सामने आया है। यहां पर उपसरपंच पति ने ग्राम पंचायत के शासकीय तालाब का ही रेलवे ठेकेदार से 4 लाख रूपए में सौदा कर लिया। इस राशि में से करीब 98 हजार रूपए की राशि पर्सनल बैंक एकाउंट में भी ट्रांसफर कराई गई। शेष राशि भी दूसरे माध्यमों से लेना बताया जा रहा है। इस मामले को लेकर ग्राम पंचायत मांजरकुई के ग्रामीणों ने कलेक्टर बालागुरू के. को शिकायत की है। इस मामले को लेकर कलेक्टर ने ग्रामीणों को कार्रवाई का आश्वासन भी दिया है।
ग्रामसभा में हुआ मनमानी का खुलासा-
बुधनी से इंदौर के बीच नई रेलवे लाईन का कार्य चल रहा है। इस दौरान रेलवे को बड़ी मात्रा में मिट्टी की जरूरत है। इसके लिए पहले जहां गंगा जल संवर्धन अभियान की आड़ में रेहटी तहसील की कई ग्राम पंचायतों के तालाबों को बेहिसाब खोद डाला, तो वहीं मांजरकुई में बना करीब 12 एकड़ का तालाब भी यहां के उपसरपंच पति ने रेलवे को 4 लाख में ठेके पर दे दिया। इसमें से करीब 98 हजार रूपए की राशि व्यक्तिगत बैंक खाते में ट्रांसफर कराई गई है। इसका खुलासा 15 अगस्त को हुई ग्राम पंचायत की ग्रामसभा बैठक में हुआ। अब इसको लेकर कलेक्टर बालागुरू के. को शिकायत की गई है।
ऐसे सामने आया मामला, हुई शिकायत –
ग्राम पंचायत मांजरकुई के ग्रामीणों ने कलेक्टर बालागुरू के. को 1 सितंबर 2026 को शिकायत की है कि उनकी ग्राम पंचायत का सार्वजनिक तालाब ग्राम के सरपंच और उपसरपंच ने रेलवे को गहरीकरण के लिए दे दिया। रेलवे द्वारा तालाब की पाल पर तार फेंसिंग, पेवर ब्लाॅक, कुर्सियां लगाने एवं पौधरोपण करने का वादा किया गया, लेकिन कोई भी कार्य नहीं कराया गया। इस दौरान 15 अगस्त को ग्राम सभा की बैठक रखी गई, जिसमें ग्रामवासियों द्वारा पूछा गया कि क्या रेल विभाग ने कलेक्टर से परमिशन ली है? ग्रामीणों ने यह भी पूछा कि रेल विभाग से कोई एग्रीमेंट हुआ है या नहीं, तब ग्राम पंचायत के सरपंच राजेश सोलंकी ने बताया कि रेलवे द्वारा पंचायत के लेटरहेड पर तालाब की पाल पर तार फेंसिंग करना, पेवर ब्लॉक लगाना, कुर्सियां लगाना, पौधारोपण करना एवं लाइट लगाने का प्रस्ताव दिया गया है। ग्रामीणों ने शिकायत में कहा है कि उपसरपंच पति द्वारा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चैहान का कहकर लेटरहेड ले लिया गया, लेकिन रेल विभाग ने यह स्वीकार नहीं किया। रेल विभाग ने कहा कि हम इतना कार्य नहीं करा पाएंगे। इसके बाद उपसरपंच पति द्वारा सरपंच से दूसरा लेटरहेड मांगा गया। सरपंच ने लेटरहेड पर सील व साइन करके दे दिया। ग्रामीणों ने जब ग्रामसभा में पूछा तो बताया गया कि उपसरपंच पति ने रेल विभाग को चार लाख रुपए में तालाब ठेके पर दे दिया और अपने पर्सनल बैंक एकाउंट में पैसे डलवाए। ग्रामवासियों को अब शक है कि उप सरपंच पति ने तालाब 4 लाख रूपए में नहीं, बल्कि इससे कई ज्यादा राशि में रेलवे को दिया है। इस मिट्टी के अवैध कार्य में उपसरपंच पति द्वारा बहुत बड़ा गबन किया गया है।
नियमों को ताक पर रखकर की गई खुदाई-
मांजरकुई स्थित शासकीय तालाब को उपसरपंच पति द्वारा मनमाने तरीके से ठेके पर देने के बाद रेलवे ठेकेदार ने भी तालाब की खुदाई मनमाने तरीके से बेहिसाब की। ग्रामीणों ने शिकायत में कहा है कि गांव के ही किसान द्वारा रेलवे को एक एकड़ जमीन पीली मिट्टी खोदने के लिए लीज पर दी गई तो उस किसान ने रेल विभाग से शर्त रखी कि उसके खेत से 1 एकड़ की ही खुदाई की जाए तथा खेत बराबर करके देना होगा। उसकी राशि 2 लाख 60 हजार रुपए तय हुई थी। इसके बाद ही रेल विभाग द्वारा उसकी खुदाई की गई थी, लेकिन मांजरकुई स्थित तालाब की खुदाई का तो कोई नाप-तौल ही नहीं है। यह तो 12 फीट से भी ज्यादा खोद लिया गया है तथा इसकी पाल पर सुरक्षा के कोई इंतजाम भी नहीं हैं। ग्रामीणों, बच्चों सहित पशुओं के लिए यह मौत का कुंआ बन गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि जब एकड़ जमीन की राशि 2 लाख 60 हजार तय हुई तो तालाब को करीब 12 एकड़ है और उस हिसाब से तो इसकी राशि करीब 20 से 30 लाख रुपए अनुमानित तय हुई होगी। ग्रामीणों ने कलेक्टर से गुहार लगाई है कि वे तालाब की खुदाई की नपाई कराएं तथा इससे प्राप्त आय को ग्राम पंचायत के विकास कार्यों में लगाएं। इसके साथ ही इस भ्रष्टाचार की जांच हो एवं गड़बड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
मिट्टी डालने के लिए कई ठेकेदारों को दिया काम-
बुधनी-इंदौर के बीच डाली जा रही रेलवे लाइन की मुख्य निर्माण और क्रियान्वयन एजेंसी रेल विकास निगम लिमिटेड (आरव्हीएनएल) है। रेल विकास निगम लि. ने ट्रैक बिछाने और सुरंगों के निर्माण जैसे विभिन्न कार्यों के लिए डीपी जैन एंड कंपनी, इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड और एमकेसी इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी अन्य निर्माण कंपनियों को काम दिए। इन कंपनियों ने भी रेलवे ट्रैक पर मिट्टी डालने के लिए काम पेटी पर दे दिए। इसके लिए गुजरात और राजस्थान के कई ठेकेदारों ने दो, तीन, चार किलोमीटर के दायरे में मिट्टी डालने का काम लिया। इन पेटी कांट्रेक्टरों ने भी बुधनी, रेहटी और भैरूंदा तहसील की ग्राम पंचायतों से जमकर अवैध मिट्टी खोदी और रेलवे ट्रैक पर डाली। इसमें भी पंचायतों के सरपंच, सचिवों ने जमकर पैसा कमाया। आरवीएनएल ने इंदौर-बुडनी रेलवे लाइन के निर्माण के लिए 436.73 करोड़ रुपए का ठेका दिया है।
बिना अनुमति खुदवा दिया तालाब-
शासकीय जमीनों पर मिट्टी खोदने के लिए खनिज विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य है, लेकिन मांजरकुई स्थित तालाब पर बिना अनुमति के ही अवैध उत्खनन किया गया। इससे जहां शासकीय खजानें को भी राजस्व की हानि हुई तो वहीं ग्राम पंचायत को भी जमकर पलीता लगाया गया।

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