शिवराज के गृह जिले सीहोर में नल-जल योजना की हवा निकली
43 प्रतिशत आबादी अब भी प्यासी, दावों से अलग जमीनी हकीकत

सीहोर। मध्य प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत घर-घर नल से जल पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। सरकार का दावा है कि प्रदेश के 77.21 प्रतिशत परिवारों तक नल का पानी पहुंच चुका है, लेकिन केंद्रीय कृषि मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले सीहोर के आंकड़े इन दावों की पोल खोल रहे हैं। सीहोर जिले की लगभग 43 प्रतिशत आबादी आज भी नल के पानी के लिए तरस रही है।
जल जीवन मिशन की जिला स्तरीय रिपोर्ट के अनुसार सीहोर में केवल 56.95 प्रतिशत परिवारों तक ही नल से जल की सुविधा पहुंच सकी है। इसका सीधा मतलब है कि जिले के करीब 43 प्रतिशत परिवार अब भी इस बुनियादी सुविधा से पूरी तरह वंचित हैं। जिस जिले का प्रतिनिधित्व प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री कर रहे हैं, वहां नल-जल योजना की यह धीमी रफ्तार स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करती है।
कवरेज पिछडऩे की क्या है वजह
लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिले में कवरेज कम होने का मुख्य कारण बहु ग्राम जल योजनाओं और बल्क वाटर सप्लाई प्रोजेक्ट्स पर निर्भरता है। विभाग का कहना है कि कई प्रोजेक्ट्स अभी भी निर्माण और काम पूरा होने के अलग-अलग चरणों में फंसे हुए हैं। अधिकारियों का दावा है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद ही स्थिति में सुधार आ सकेगा।
पानी की जांच के भी पुख्ता इंतजाम नहीं
जिले में न केवल पानी की आपूर्ति में देरी हो रही है, बल्कि जल की गुणवत्ता जांचने की व्यवस्था भी सीमित है। हालांकि प्रदेश भर में लैब का नेटवर्क होने का दावा किया जाता है, लेकिन रासायनिक विषाक्तता जैसी गंभीर जांच की सुविधा अभी भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में सीहोर की एक बड़ी आबादी तक स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल पहुंचाना अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
नर्मदा जल का भी इंतजार
इधर नल जल योजना की भांति नर्मदा जल का भी लोगों को बेसब्री से इंतजान है। जिले में सीहोर में नर्मदा नदी से पानी लाने की जल आवर्धन योजना को वर्ष 2012-13 में प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद 2014 में काम शुरू किया गया था। निर्माण एजेंसी को 24 महीने की समयावधि दी गई थी और 2016 तक घर-घर नर्मदा जल पहुंचाने का लक्ष्य था। हालांकि शाहगंज से सीहोर तक 60-70 किमी लंबी पाइपलाइन बिछाने में वन विभाग की अनुमतियों, भूमि अधिग्रहण, एनएच और रेलवे क्रासिंग जैसे रोड़ों के कारण काम लटकता गया। वर्ष 2018-19 में ट्रायल के दौरान पाइपलाइन में लीकेज और दबाव की दिक्कतें आईं। दावों के मुताबिक वर्ष 2021-22 तक आपूर्ति सुचारु होनी थी, लेकिन अगस्त 2026 आ जाने के बाद भी नलों से नर्मदा जल का इंतजार खत्म नहीं हुआ है।



