सलकनपुर में करोड़ों की लागत से बन रहे देवी लोक में पहली ही बारिश ने खोली दावों की पोल

64 योगिनी मंदिर में टपका पानी, मणिदीप में भरा जल, 80 फीसदी पौधे सूखे, निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

सीहोर। उज्जैन के महाकाल लोक की तर्ज पर प्रसिद्ध देवी धाम सलकनपुर में करीब 97 करोड़ रुपये की लागत से आकार ले रहे देवी लोक के निर्माण और रखरखाव के दावों की पहली ही बारिश में हवा निकल गई है। पहली बारिश में ही परिसर में जगह-जगह पानी के रिसाव और जलभराव ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसके अलावा बदहाल पौधरोपण, अधूरी प्रतिमा स्थापना और परिसर की अव्यवस्थाएं जिम्मेदार निर्माण एजेंसियों को कठघरे में खड़ा कर रही हैं।

जानकारी के अनुसार परियोजना के तहत करीब 90.35 करोड़ रुपये की लागत से सिविल निर्माण कार्य किए गए हैं। इसके अंतर्गत बने प्रसिद्ध 64 योगिनी मंदिर में पहली ही बारिश में पिलरों के किनारों से पानी टपकने लगा। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी पहले ही मानसून में पानी का रिसाव होना निर्माण की गुणवत्ता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।
80 प्रतिशत पौधे देखरेख के अभाव में सूखे
परिसर को हरा-भरा और सुंदर बनाने के लिए ट्री-गार्ड सहित कुल 444 पौधे लगाए गए थे। प्रति पौधा लगभग 1800 का खर्च आया था। लेकिन उचित देखरेख और मेंटेनेंस न होने के कारण वर्तमान में इनमें से लगभग 80 प्रतिशत पौधे सूख चुके हैं, जिससे शासन के लाखों रुपये पानी में बह गए हैं।
आदिशक्ति पेडस्टल अब भी प्रतिमा का मोहताज
देवी लोक के मुख्य आकर्षणों में शामिल आदिशक्ति पेडस्टल पर अब तक प्रतिमा स्थापित नहीं हो सकी है। हालांकि निर्माण एजेंसी ने जुलाई के अंतिम सप्ताह तक प्रतिमा स्थापित करने का आश्वासन दिया था, लेकिन धरातल पर अब तक काम शुरू नहीं हो सका है और न ही कोई प्रगति दिखाई दे रही है।
बंसी पहाड़पुर पत्थरों पर फिसलने का खतरा
देवी लोक के मणिदीप क्षेत्र में फर्श पर बंसी पहाड़पुर के खूबसूरत पत्थर बिछाए गए हैं। लेकिन सही निकासी न होने से पहली ही बारिश में यहां पानी जमा हो गया। पानी भरने के कारण इन पत्थरों पर काई जमने और श्रद्धालुओं के फिसलकर दुर्घटनाग्रस्त होने का भारी अंदेशा बना हुआ है।
3 साल का मेंटेनेंस पीरियड, फिर भी बदहाली और अंधेरा
नियमानुसार परियोजना के निर्माण के बाद 3 वर्षों तक रखरखाव की जिम्मेदारी निर्माण एजेंसी की है। इसके बावजूद धर्मशाला, मार्केट और मेला ग्राउंड क्षेत्र में कीचड़, कचरा और बदहाली पसरी हुई है। इसके अलावा परिसर में लगाई गईं अधिकांश हाईमास्ट लाइटें बंद पड़ी हैं और कुछ हवा में झूल रही हैं।
जानकरी मिली है
मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम की कार्यपालन यंत्री मनीषा भारती के अनुसार पानी टपकने और पौधों की स्थिति की जानकारी मिली है। शीघ्र ही पूरी स्थिति का निरीक्षण किया जाएगा और जो भी कमियां पाई जाएंगी, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त कराया जाएगा।

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