
सीहोर। जहां एक तरफ पूरे जिले में रक्षाबंधन के त्योहार पर बहनें भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर जश्न मना रही थीं, वहीं पालीवाल ब्राह्मण समाज ने सदियों पुरानी अपनी एक अनूठी और भावुक परंपरा का निर्वहन किया। सीहोर, आष्टा और शाहगंज में पालीवाल समाज के लोगों ने रक्षाबंधन का पर्व नहीं मनाया। समाजजनों ने रक्षासूत्र बांधने के बजाय 735 साल पहले धर्म और मातृभूमि की रक्षा में शहीद हुए अपने हजारों पूर्वजों को नमन कर उन्हें अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित की।
पालीवाल ब्राह्मण समाज के इतिहास के अनुसार श्रावणी पूर्णिमा के ही ऐतिहासिक दिन राजस्थान के पाली शहर में समाज पर एक भीषण हमला हुआ था। उस दौरान हजारों पालीवाल ब्राह्मणों ने अपनी मातृभूमि, धर्म और स्वाभिमान की रक्षा करते हुए हंसते-हंसते अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। उसी भीषण शहादत और शोक की याद में समाज ने उस दिन से रक्षाबंधन न मनाने का संकल्प लिया था। सैकड़ों वर्ष बीत जाने के बाद भी आज की नई पीढ़ी इस परंपरा को पूरी निष्ठा के साथ निभा रही है।
सीहोर, आष्टा और शाहगंज में निभाई गई परंपरा
रक्षाबंधन के अवसर पर सीहोर, शाहगंज और आष्टा में पालीवाल समाज के परिवारों में राखी का त्योहार नहीं मना। समाज के लोगों ने एकत्रित होकर अपने पूर्वजों के त्याग, शौर्य और बलिदान को याद किया। सीहोर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान समाजजनों ने शहीदों के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके पदचिन्हों पर चलने का संकल्प दोहराया। समाज के प्रबुद्धजनों ने कहा कि यह दिन हमारे लिए केवल एक तारीख नहींए बल्कि अपने पूर्वजों की वीरता और स्वाभिमान को नमन करने का पावन अवसर है।
श्रद्धांजलि सभा में उमड़े समाजजन
इस विशेष अवसर पर सीहोर में समाज अध्यक्ष कृष्णकांत पालीवाल, सचिव प्रदीप पालीवाल, कोषाध्यक्ष नरेंद्र पालीवाल, मीडिया प्रभारी सक्षम पालीवाल तथा उपाध्यक्ष संजय पालीवाल सहित कार्यकारिणी सदस्य मोहन पालीवाल, अशोक पालीवाल, संजय पालीवाल, अनिल पालीवाल, बाबू दादा, बृजेश पालीवाल, राजेश पालीवाल, राजेंद्र पालीवाल, राज रतन पालीवाल, सोनू पालीवाल, लीलाधर पालीवाल, महेश पालीवाल, गोपाल पालीवाल और मदनलाल पालीवाल प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
वहीं शाहगंज और आष्टा में मनीष पालीवाल, मदनलाल पालीवाल सहित स्थानीय समाजजनों ने शहीदों को याद किया। महिला मंडल की ओर से पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमारी पालीवाल, पूर्व मंत्री अंजू पालीवाल, कीर्ति पालीवाल, बबली पालीवाल, मीना पालीवाल, निधि पालीवाल, आशा पालीवाल और प्रभा पालीवाल सहित बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी इस शहादत को नमन कर अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की।