कुबेरेश्वरधाम पर गंगा दशहरा पर भव्य आयोजन, हजारों श्रद्धालुओं ने एक साथ किया भगवान शिव का जलाभिषेक

पंडित प्रदीप मिश्रा ने बताया शिवलिंग पर अभिषेक कलश रखने का महत्व

सीहोर। जिला मुख्यालय के समीपस्थ चितावलिया हेमा स्थित कुबेरेश्वरधाम पर गंगा दशहरा का पर्व बेहद हर्षोल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर आए हजारों श्रद्धालुओं ने एक साथ मटकी के कलश से भगवान शिव का सामूहिक जलाभिषेक किया। धाम पर अलसुबह से ही अभिषेक और पूजा-अर्चना का दौर शुरू हो गया था, जो देर शाम तक अनवरत चलता रहा। इस दौरान विठलेश सेवा समिति की ओर से संचालित निशुल्क भंडारे में पंडित विनय मिश्रा, पंडित समीर शुक्ला सहित अन्य सेवादारों द्वारा श्रद्धालुओं को प्रसादी का वितरण किया गया।
शाम को बाबा की महाआरती में सम्मिलित होने पहुंचे कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने गंगा दशहरा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महादेव पर चढऩे वाली निरंतर जलधारा उन्हें अत्यंत प्रसन्न करती है। इससे भक्तों के जीवन और घर में धन-धान्य, सुख-समृद्धि और शांति की वृद्धि होती है। उन्होंने शिवलिंग पर जलपात्र अभिषेक कलश टांगने की परंपरा के पीछे का वैज्ञानिक और धार्मिक कारण बताते हुए कहा कि ग्रीष्म ऋतु गर्मी के दिनों में पानी की भारी किल्लत होती है, जिससे इंसान और पशु-पक्षी बूंद-बूंद पानी के लिए तरसते हैं। इसी तपन से सृष्टि के पालनहार भगवान शिव को शीतलता प्रदान करने और उन्हें पानी की कमी न होने देने के भाव से शिवलिंग के ऊपर अभिषेक कलश रखा जाता है।
मंदिरों में हुआ विशेष श्रृंगार, उमड़ी भीड़
गंगा दशहरा के पावन पर्व पर कुबेरेश्वरधाम परिसर के साथ-साथ शहर के प्राचीन मुरली मनोहर मंदिर में भी सुबह से धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो गए थे। यहां मंदिर में विराजमान भगवान शंकर-माता पार्वती, प्रभु राम-सीता और भगवान श्रीकृष्ण व राधा जी का मनोहारी और विशेष श्रृंगार किया गया, जिसके दर्शनों के लिए दिन भर भक्तों का तांता लगा रहा।
राजा भगीरथ की तपस्या और मां गंगा के अवतरण की कथा
विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित ने पर्व की पौराणिक कथा का उल्लेख करते हुए बताया कि राजा सगर के साठ हजार पुत्रों को कपिल मुनि ने क्रोधवश अपने तप से भस्म कर दिया था। बाद में उनके वंशज राजा भगीरथ ने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए मां गंगा और भगवान शिव की कठोर तपस्या की। भगीरथ के इस परम प्रयास से मां गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुईं और सगर के साठ हजार पुत्रों को मोक्ष प्राप्त हुआ। इसी अवतरण के उपलक्ष्य में गंगा दशहरा मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसारए इस पवित्र दिन गंगा स्नान या स्मरण करने से मनुष्य के कायिक, वाचिक और मानसिक सहित कुल दस प्रकार के पापों का नाश होता है। दशहरा शब्द का मूल अर्थ ही दस पापों का हरण करने वाला है।

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