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प्रसिद्ध गायक कीर्तिदान गढ़वी की भजनों पर झूमे हजारों श्रद्धालु

सीहोर। जिला मुख्यालय के समीपस्थ प्रसिद्ध धार्मिक स्थल कुबेरेश्वरधाम में हर साल की तरह इस वर्ष भी कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा का जन्मोत्सव भारी आस्था और उत्साह के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर आयोजित भव्य भक्ति संध्या में देश के सुप्रसिद्ध भजन गायक कीर्तिदान गढ़वी ने अपनी मधुर और जादुई प्रस्तुतियों से पंडाल में मौजूद हजारों श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। देर रात तक चले इस आयोजन में पूरा वातावरण शिवमय नजर आया।

बता दें विठलेश सेवा समिति के तत्वाधान में कुबेरेश्वरधाम परिसर में एक विशाल पंडाल और बेहद खूबसूरत मंच सजाया गया था। रात्रि में बाबा की विशेष आरती के पश्चात भजन संध्या की शुरुआत हुई। समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित ने बताया कि जैसे ही सुप्रसिद्ध गायक कीर्तिदान गढ़वी ने मंच संभाला और भगवान शिव व सनातन संस्कृति से ओतप्रोत अपने लोकप्रिय भजनों का गायन शुरू किया, वैसे ही पूरा पंडाल हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से गूंज उठा। हजारों श्रद्धालु भजनों की धुन पर हाथ उठाकर झूमने और नाचने पर मजबूर हो गए।
संकट कितने भी बड़े हों, शिव पर भरोसा रखें
जन्मोत्सव के इस विशेष मौके पर कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने उपस्थित जनसमुदाय को आशीर्वाद देते हुए शिव भक्ति की महिमा बताई। उन्होंने कहा कि भगवान शिव पर सच्चा भरोसा रखने वाला व्यक्ति जीवन में कभी निराश नहीं होता। महादेव अपने भक्तों का हर परिस्थिति में कल्याण करते हैं। पंडित मिश्रा ने कहा कि मनुष्य के जीवन में कितनी भी कठिन परिस्थितियां या संकट क्यों न आएं, यदि वह पूरी श्रद्धा और अटूट विश्वास के साथ महादेव का स्मरण करता है तो उसके सभी दुखों का समाधान स्वत: ही मिल जाता है। शिव जी अपने भक्तों को हर मुश्किल से लडऩे का धैर्य और शक्ति प्रदान करते हैं। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से नियमित रूप से शिव पूजन, जल अभिषेक करने और निस्वार्थ भाव से मानव सेवा करने का संकल्प दिलाया।
कुबेरेश्वरधाम में उमड़ी हजारों की भीड़ को देखते हुए विठलेश सेवा समिति की ओर से पंडित विनय मिश्रा, पंडित समीर शुक्ला सहित पूरी टीम ने सुरक्षाए बैठक और भोजन प्रसादी की व्यापक व्यवस्था की थी। दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों ने मुस्तैदी से अपनी सेवाएं दीं। देर रात तक श्रद्धालु भक्ति रस की इस गंगा में डुबकी लगाते रहे।

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