
सीहोर। हमें तुमसे प्यार कितना, यह हम नहीं जानते… और छूकर मेरे मन को किया तूने क्या इशारा… जैसे सदाबहार नगमों की सुरीली धुनों से जब सीहोर की शाम सजी तो हर कोई पुराने दौर की सुनहरी यादों में खो गया। अवसर था सरगम के साथियों द्वारा आयोजित 80 और 90 के दशक के लोकप्रिय फिल्मी गीतों के एक विशेष संगीतमय कार्यक्रम का। इस सुरमई शाम में कलाकारों ने एक से बढक़र एक प्रस्तुतियां देकर संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया और पूरा माहौल तालियों की गडग़ड़ाहट से गूंज उठा।
कार्यक्रम में पाश्र्व गायक किशोर कुमार, लता मंगेशकर, आशा भोंसले, कुमार शानू और उदित नारायण के गाए यादगार गीतों की शानदार श्रृंखला पेश की गई। कलाकारों ने किसी नजर को तेरा इंतजार है, ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो, जानम देख लो मिट गईं दूरियां, दिल तो पागल है, मेरा चांद मुझे आया है नजर, पग घुंघरू बांध मीरा नाची थी, एक दो तीन, दीदी तेरा देवर दीवाना, दो दिल मिल रहे हैं और अब तेरे बिन जी लेंगे हम, जैसे अनेक सुपरहिट गानों से समां बांध दिया।
इन कलाकारों ने बटोरी तालियां
मंच पर राजेश काशिव और सीमा जोशी की जुगलबंदी और सुरों के तालमेल ने श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी। इसके साथ ही डॉ. श्रेष्ठा सक्सेना ने भी अपनी मधुर और सुरीली आवाज में गीत प्रस्तुत कर सभी का दिल जीत लिया। हर एक गाने के बाद हाल में मौजूद संगीत प्रेमी भाव विभोर होकर कलाकारों का उत्साहवर्धन करते नजर आए।
कार्यक्रम की शुरुआत में अतिथियों का आत्मीय स्वागत राजेश काशिव, सीमा जोशी और प्रदीप नागिया ने किया। कार्यक्रम का संचालन प्रदीप नागिया द्वारा किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ समाजसेवी रामनारायण ताम्रकार, प्रेमलता राठौर, रीटा दुबे सहित बड़ी संख्या में शहर के गणमान्य नागरिक और संगीत प्रेमी उपस्थित रहे।