मुरम खदान में नहाने गए दो मासूम बच्चों की गहरे पानी में डूबने से मौत

सीहोर। जिले के आष्टा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम बागेर में शनिवार को एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां एक बंद पड़ी मुरम की खदान में जमा पानी में नहाने और तैरने गए दो मासूम बच्चों की गहरे पानी में समा जाने के कारण असमय मौत हो गई। घटना के बाद से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।
जानकारी के अनुसार ग्राम बापचा दोनिया के रहने वाले दो बच्चे, जिनकी पहचान समर और संतोष दोनों की उम्र लगभग 12 वर्ष के रूप में हुई है, दोपहर के समय पास के ही ग्राम बागेर स्थित मुरम की खदान की तरफ गए थे। बताया जा रहा है कि बारिश से खदान के बड़े गड्ढे में पानी जमा था, जिसे देखकर दोनों बच्चे उसमें नहाने और तैरने के लिए उतर गए। नहाते-नहाते दोनों मासूमों को पानी की गहराई का अंदाजा नहीं रहा और वे खदान के उस हिस्से में चले गए जहां पानी गहरा था। अत्यधिक गहराई होने के कारण दोनों बच्चे खुद को संभाल नहीं पाए और पानी में डूब गए।
आष्टा सिविल अस्पताल लाया गया शव
जब आसपास के लोगों को घटना की भनक लगी तो मौके पर हडक़ंप मच गया। तुरंत ही स्थानीय ग्रामीणों की मदद से बच्चों को पानी से बाहर निकालने के प्रयास शुरू किए गए। काफी मशक्कत के बाद दोनों बच्चों को पानी से बाहर निकाला जा सका, लेकिन तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं। घटना की सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस प्रशासन को दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने शवों को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए आष्टा के सिविल अस्पताल भेजा गया है।
सुरक्षा इंतजाम न होने से खदानें बनीं मौत का कुआं
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर क्षेत्र में अवैध और असुरक्षित रूप से छोड़ी गई मुरम व रेत की खदानों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि खनन माफिया और ठेकेदार मुरम निकालने के बाद इन खदानों को खुला और गहरा ही छोड़ देते हैं। बारिश में इनमें पानी भर जाता है, जो बच्चों और मवेशियों के लिए मौत का कुआं साबित होते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसी खतरनाक खदानों को जल्द से जल्द भरवाया जाए या उनके आसपास फेंसिंग कराई जाए ताकि भविष्य में किसी और मां की गोद सूनी न हो। पुलिस ने फिलहाल मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

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