वीआईटी यूनिवर्सिटी में टाइफाइड का खौफ, 250 छात्र बीमार, प्रबंधन और रिपोर्ट के दावों में उलझा मामला

सीहोर। कोठरी स्थित वीआईटी यूनिवर्सिटी एक बार फिर विवादों में है। पिछले 10 दिनों के भीतर कैंपस में रहने वाले 250 से ज्यादा छात्र-छात्राओं को तेज बुखार और बीमारी ने अपनी चपेट में ले लिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि जहां एक तरफ मेडिकल रिपोट्र्स टाइफाइड की पुष्टि कर रही हैं, वहीं यूनिवर्सिटी प्रबंधन इसे महज वायरल फीवर बताकर मामले को ठंडा करने की कोशिश कर रहा है।
मीडिया रिपोट्स के अनुसार चिरायु मेडिकल कॉलेज की पैथोलॉजी रिपोर्ट के अनुसार जांच के लिए भेजे गए 57 सैंपल्स में से 23 छात्रों में साल्मोनेला टाइफी (टाइफाइड का बैक्टीरिया) पाया गया है। अभी 34 अन्य सैंपल्स की रिपोर्ट आनी बाकी है। खबर यह भी है कि एक छात्र की हालत इतनी गंभीर हो गई कि उसे आईसीयू में भर्ती करना पड़ा है। हालांकि तीन अन्य छात्रों को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है।
प्रबंधन और डॉक्टर के दावों में टकराव
यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार केके नायर का दावा है कि टाइफाइड की खबरें गलत हैं और केवल 80 बच्चों को मौसमी वायरल बुखार हुआ था। उन्होंने यह भी कहा कि एहतियात के तौर पर 2025 बैच के छात्रों को छुट्टी दे दी गई है।
दूसरी ओर चिरायु मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर डॉ. अजय गोयनका ने स्पष्ट किया है कि 23 छात्रों की ब्लड कल्चर रिपोर्ट टाइफाइड पॉजिटिव आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि एक ही जगह पर इतनी बड़ी संख्या में टाइफाइड मिलना वहां के खाने या पानी में गंभीर संक्रमण का सीधा संकेत है।
पुलिस और अधिकारियों ने ली बैठक
बीमारियों और अव्यवस्थाओं की खबरों के बीच प्रशासन ने मोर्चा संभाल लिया है। एसपी दीपक कुमार शुक्ला के निर्देश पर एसडीओपी दामोदर गुप्ता और तहसीलदार ने यूनिवर्सिटी प्रबंधन के साथ आपातकालीन बैठक की। प्रशासन ने प्रबंधन को दो-टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि छात्रों के स्वास्थ्य, खाने की क्वालिटी और ठंडे पानी की सप्लाई को लेकर कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पुराना है विवादों से नाता
यह पहली बार नहीं है जब वीआईटी पानी और मेस को लेकर चर्चा में आई है। नवंबर 2025 में भी दूषित पानी के कारण छात्रों ने भारी हंगामा और तोडफ़ोड़ की थी, जिसे काबू करने के लिए पुलिस और एसटीएफ बुलानी पड़ी थी।



