सीहोर में ‘पति राज’ पर संग्राम, जपं. में महिला जनप्रतिनिधि की जगह पति ने संभाली कमान

सीहोर। जनपद पंचायत सीहोर में बीते दिनों आयोजित एक कार्यक्रम को लेकर राजनीति गरमा गई है। महिलाओं को प्रशासनिक और राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने के दावों के बीच एक बार फिर ‘पति राज’ का मुद्दा गरमा गया है। जिला कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि जनपद की आधिकारिक बैठक में चुनी हुई महिला जनप्रतिनिधियों के स्थान पर उनके पतियों ने न सिर्फ हिस्सा लिया, बल्कि गैर निर्वाचित भाजपा नेता ने बैठक की अध्यक्षता भी की। वहीं भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे केवल एक प्रशिक्षण कार्यशाला बताया है।
जिला कांग्रेस प्रवक्ता पंकज शर्मा ने आरोप लगाया कि 17 सितंबर को जनपद पंचायत सीहोर में 16वें वित्त आयोग के क्रियान्वयन और जल जीवन मिशन के प्रशिक्षण के सिलसिले में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें कई वित्तीय प्रस्तावों को मंजूरी दी जानी थी।
पंकज शर्मा के अनुसार कार्यक्रम के आधिकारिक एजेंडे में केवल निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के शामिल होने का नियम था और किसी भी प्रतिनिधि ‘पति या रिश्तेदार’ के शामिल होने की अनुमति नहीं थी। इसके बावजूद नियमों को ताक पर रखकर कई महिला सदस्यों के पति बैठक में मौजूद रहे। इतना ही नहीं जिला पंचायत अध्यक्ष के पति और भाजपा नेता सुरेंद्र सिंह मेवाड़ा ने इस कार्यक्रम की अध्यक्षता की, जबकि वे खुद कोई निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं हैं। कांग्रेस ने इसे महिला जनप्रतिनिधियों के अधिकारों पर सीधा हमला बताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार भाजपा नेता व लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
भाजपा का पलटवार, बैठक नहीं, केवल कार्यशाला थी
दूसरी ओर भाजपा ने कांग्रेस के इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। भाजपा के जिला मीडिया प्रभारी प्रीतेश राठौर ने सफाई देते हुए कहा कि 17 सितंबर को जनपद में जल जीवन मिशन से जुड़ी एक सामान्य कार्यशाला आयोजित की गई थी, न कि कोई आधिकारिक प्रशासनिक या वित्तीय बैठक। राठौर ने कहा कि इसमें किसी अध्यक्षता या वित्तीय निर्णय का सवाल ही नहीं उठता और कांग्रेस जानबूझकर एक जागरूकता कार्यशाला को राजनीतिक रंग देकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है।
अक्सर सुर्खियों में रहता है ‘पति राज’ का मुद्दा
बता दें त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान इसलिए किया गया था ताकि महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर प्रशासनिक निर्णयों में अपनी भागीदारी निभा सकें। हालांकि सीहोर जिले में जमीनी हकीकत यह है कि चुनावी जीत के बाद प्रशासनिक बैठकों और कागजी कार्यवाहियों की कमान महिला प्रतिनिधियों के पति ही संभालते देखे जाते हैं।

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