
सीहोर। बुधनी नगर परिषद के वार्ड क्रमांक 10 में इन दिनों चल रहा जनगणना एवं मकान सूचीकरण का कार्य विवादों के घेरे में आ गया है। क्षेत्र के नागरिकों द्वारा लगातार गंभीर लापरवाही और अनियमितताओं की शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं। वार्ड वासियों का आरोप है कि सर्वे के दौरान कई मकानों पर नंबर ही नहीं डाले गए, परिवारों की जानकारी अधूरी छोड़ी गई तो वहीं कुछ जगहों पर एक ही मकान पर दो-दो जनगणना क्रमांक अंकित कर दिए गए हैं। लगातार सामने आ रहे इन मामलों के बाद अब पूरे वार्ड के सर्वे पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
ताजा मामला वार्ड क्रमांक 10 के बुधनी घाट क्षेत्र से सामने आया है। यहां के स्थानीय निवासी बद्री नारायण ने तहसीलदार एवं जनगणना चार्ज अधिकारी को एक लिखित शिकायत सौंपी है। बद्री नारायण का कहना है कि वे लंबे समय से इस क्षेत्र में रह रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उनके मकान का क्रमांकन (नंबरिंग) नहीं किया गया और न ही उनके परिवार की कोई जानकारी दर्ज की गई। उन्होंने मांग की है कि उनके परिवार को जनगणना के सरकारी अभिलेखों में शामिल किया जाए।
बिना जानकारी लिए घर पर लिख दिए दो नंबर
एक अन्य अजीबोगरीब मामला इसी वार्ड के निवासी राम शर्मा का सामने आया है। उनका आरोप है कि जनगणना कर्मियों ने उनसे किसी भी प्रकार की कोई जानकारी या पूछताछ नहीं की, लेकिन उनके मकान पर दो अलग-अलग जनगणना क्रमांक लिख दिए गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि सर्वे में इतनी बड़ी लापरवाही कर्मचारियों की गैर-जिम्मेदाराना कार्यप्रणाली को दर्शाती है।
भीषण गर्मी में 2 किमी पैदल चलने को मजबूर दिव्यांग
लापरवाही का सबसे संवेदनशील और चिंताजनक पहलू यह है कि क्षेत्र का एक पैर से दिव्यांग व्यक्ति खुद को बुधनी का निवासी साबित करने और अपने आशियाने को जनगणना में दर्ज कराने के लिए भटक रहा है। वह इस भीषण गर्मी में न्याय की गुहार लेकर बुधनी तहसील, एसडीएम कार्यालय और नगर परिषद कार्यालय के लगातार चक्कर काट रहा है। लगभग दो किलोमीटर पैदल चलकर वह अधिकारियों के पास पहुंच रहा है, लेकिन अब तक उसकी इस गंभीर समस्या का कोई समाधान नहीं निकल सका है।
पूर्व पार्षद की शिकायत पर फजीहत
बता दें उल्लेखनीय है कि वार्ड क्रमांक 10 में लापरवाही का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले पूर्व पार्षद कंचन शर्मा ने भी लिखित शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके मकान को छोड़ दिया गया है और उनसे निर्धारित प्रश्न भी नहीं पूछे गए। इस शिकायत के बाद प्रशासनिक अमले में हडक़ंप मच गया था और अधिकारियों को खुद मौके पर पहुंचकर त्रुटियों में सुधार करना पड़ा था। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब एक पूर्व जनप्रतिनिधि की शिकायत सही पाई जा चुकी है तो आम जनता की शिकायतों को भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
सीएमओ मौन
नागरिकों ने आरोप लगाया है कि जनगणना जैसे राष्ट्रीय और अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य में इतनी बड़ी गड़बड़ी होने के बावजूद नगर परिषद प्रशासन और मुख्य नगर पालिका अधिकारी मौन साधे बैठे हैं। जनता का कहना है कि इस लापरवाही के लिए न केवल सर्वे करने वाले कर्मचारी, बल्कि इसकी मॉनिटरिंग करने वाले अधिकारी भी समान रूप से जिम्मेदार हैं।
पुन: सर्वे और कार्रवाई की मांग
लगातार बढ़ती शिकायतों के बीच वार्ड के नागरिकों ने जिला प्रशासन, एसडीएम और तहसीलदार से इस पूरे सर्वे कार्य की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। नागरिकों की मांग है कि दोषी कर्मचारियों पर तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए और छूटे हुए परिवारों व मकानों का दोबारा से भौतिक सत्यापन कराया जाए ताकि कोई भी नागरिक इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया से वंचित न रह सके।