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जलसंकट: 1.40 करोड़ की योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी, 6 साल से अधूरी, खेतों से पाइपलाइन खींचकर प्यास बुझा रहे ग्रामीण

3 हजार की आबादी वाले गांव के सभी 13 हैंडपंप सूखे

सीहोर। विधानसभा क्षेत्र के ग्राम मुंगावली में भीषण गर्मी के बीच जल संकट ने विकराल रूप ले लिया है। गांव के तमाम पारंपरिक जल स्रोत और भूजल स्तर गिरने से सभी सरकारी हैंडपंप पूरी तरह सूख चुके हैं। आलम यह है कि ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए गांव से दूर खेतों और दूसरे गांवों का रुख करना पड़ रहा है। ग्रामीणों को इस समस्या से निजात दिलाने के लिए शुरू की गई 1.40 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना पिछले 6 साल से ठेकेदारों और अधिकारियों की लापरवाही के कारण अधर में लटकी हुई है।
बता दें करीब 3 हजार की आबादी और 889 मकानों वाले मुंगावली गांव में पानी की आपूर्ति के लिए 13 सरकारी हैंडपंप लगाए गए थे। लेकिन इस बार जनवरी महीने में ही इन हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया। जल स्तर काफी नीचे चले जाने के कारण ये सभी हैंडपंप अब शोपीस बने हुए हैं। पानी के इंतजाम के चक्कर में ग्रामीणों का काम-धंधा और खेती प्रभावित हो रही हैए क्योंकि दिन का एक बड़ा हिस्सा सिर्फ पानी ढोने में ही बीत जाता है।
लापरवाही और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी करोड़ों की योजना
ग्रामीणों को घर-घर पानी देने के लिए सरकार ने 1.40 करोड़ रुपये की पेयजल योजना स्वीकृत की थी। इसके तहत गांव में पानी की टंकी का निर्माण भी कराया गया, लेकिन अधिकारियों और ठेकेदारों की कथित साठगांठ के चलते काम में भारी लापरवाही बरती गई।
पिछले 6 सालों में इस योजना पर काम करने वाले पीएचई विभाग के दो ठेकेदार काम अधूरा छोडक़र भाग गए। घटिया निर्माण और समय पर काम पूरा न करने के कारण विभाग ने निर्माण कंपनी अंबकेश्वर स्टील और राधिका अग्रवाल को ब्लैकलिस्ट कर दिया। इसके बाद कई सालों तक काम पूरी तरह बंद रहा। वर्तमान में देवास की टी एंड के कंस्ट्रक्शन कंपनी को काम सौंपा गया है, लेकिन योजना आज भी अधूरी ही है।
ग्रामीणों पर दोहरी मार
जिन किसानों के पास खेतों में निजी ट्यूबवेल हैं, उन्होंने बल्लियों के सहारे लंबी पाइपलाइन खींचकर गांव तक पानी पहुंचाया है। लेकिन गांव के जिन गरीब परिवारों के पास न तो खुद की जमीन है और न ही निजी बोर, वे पूरी तरह दूसरों की दया पर निर्भर हैं।
जल्द पूरी होगी योजना
इस पूरे मामले में पीएचई विभाग के कार्यपालन यंत्री प्रदीप कुमार सक्सेना का कहना है कि समय पर काम नहीं करने के कारण पूर्व के दो ठेकेदारों को ब्लैकलिस्टेड किया गया था, जिसकी वजह से योजना में देरी हुई है। अब नए ठेकेदार को काम सौंपकर प्रक्रिया दोबारा शुरू कराई गई है, जल्द ही इस योजना को पूरा कर ग्रामीणों को पानी की सप्लाई शुरू कर दी जाएगी।

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