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महिला दिवस विशेष: ‘शिव’ की सफलता का आधार है ‘साधना’

सीहोर। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आज हम एक ऐसी शक्ति की चर्चा कर रहे हैं, जो पिछले 34 वर्षों से भारतीय राजनीति के दिग्गज नेता और वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की सबसे बड़ी प्रेरणा रही हैं। वे हैं साधना सिंह चौहान, जिनका साथ न केवल निजी जीवन बल्कि शिवराज सिंह के सार्वजनिक और राजनैतिक सफर के लिए भी लकी चार्म साबित हुआ है। 1992 में परिणय सूत्र में बंधने के बाद से आज तक, चाहे सांसद का दौर हो, रिकॉर्ड चार बार मुख्यमंत्री का कार्यकाल या अब केंद्र में कद्दावर मंत्री की भूमिका साधना सिंह हर मोड़ पर एक मजबूत स्तंभ और ढाल बनकर खड़ी रही हैं। 2003 के राघौगढ़ के ऐतिहासिक रण से लेकर 2018 के सत्ता परिवर्तन के संघर्ष तक, उन्होंने न केवल परिवार संभाला बल्कि कार्यकर्ताओं का मनोबल भी टूटने नहीं दिया। आज दिल्ली के गलियारों तक पहुंचा यह सफर साधना सिंह की उसी मौन ‘साधना’ और समर्पण की कहानी है, जिसने एक पुरुष की सफलता को पूर्णता प्रदान की है।
रिकॉर्ड बताते हैं कि शिवराज सिंह चौहान के जीवन में साल 1992 एक बड़ा टर्निंग पॉइंट रहा। इसी साल 6 मई को वे साधना सिंह के साथ परिणय सूत्र में बंधे थे। दिलचस्प बात यह है कि इस विवाह के बाद से पिछले 34 वर्षों में शिवराज सिंह चौहान ने कभी पीछे मुडक़र नहीं देखा। शादी के बाद से वे लगातार सांसद, विधायक, रिकॉर्ड चार बार मुख्यमंत्री और अब केंद्र में कद्दावर कृषि मंत्री की भूमिका निभा रहे हैं। राजनीति के जानकार मानते हैं कि साधना सिंह चौहान, शिवराज के लिए न केवल जीवनसंगिनी, बल्कि एक लकी चार्म भी साबित हुई हैं।
प्रदेश की एकमात्र महिला जो हर शीर्ष पद की साक्षी
साधना सिंह चौहान संभवत: मध्य प्रदेश की एकमात्र ऐसी महिला हैं, जो विवाह के बाद से ही लगातार अपने पति को देश के शीर्ष पदों पर आसीन देख रही हैं। वे एक सांसद की पत्नी रहीं, फिर पांच बार के सांसद, रिकॉर्ड समय तक मुख्यमंत्री और अब देश के कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री की पत्नी के रूप में उनकी पहचान अडिग है। शिवराज सिंह की लंबी और सफल राजनीतिक पारी में साधना सिंह एक मजबूत स्तंभ की तरह खड़ी रही हैं। घर-परिवार की जिम्मेदारी संभालने से लेकर क्षेत्र की जनता और कार्यकर्ताओं से जीवंत जुड़ाव रखने तक, उन्होंने हर मोर्चे पर अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई है।
संकट में बनीं ढाल, 2018 से 2020 का सफर
शिवराज सिंह चौहान के राजनीतिक जीवन में कई उतार-चढ़ाव आए। साल 2018 में जब भाजपा की सत्ता हाथ से गई, तब वह साधना सिंह ही थीं जिन्होंने परिवार और कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटने नहीं दिया। उनके इसी संबल का परिणाम रहा कि 2020 में शिवराज सिंह ने फिर से शानदार वापसी की। राजनीति के रणक्षेत्र की बात करें तो 2003 के ऐतिहासिक चुनाव में, जब शिवराज सिंह को तत्कालीन सीएम दिग्विजय सिंह के सामने राघौगढ़ से मैदान में उतारा गया था, तब साधना सिंह ने कंधे से कंधा मिलाकर साथ निभाया। उस चुनाव ने न केवल दिग्विजय सिंह को उनके क्षेत्र तक सीमित किया, बल्कि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन की नींव भी रखी।
एक समर्पित ‘साधना’
आज जब शिवराज सिंह चौहान मोदी सरकार में कृषि और ग्रामीण विकास जैसे अति महत्वपूर्ण विभागों को संभाल रहे हैं, साधना सिंह चौहान आज भी उनके पीछे एक मौन साधक की तरह खड़ी हैं। सीहोर जिले के जैत गांव से शुरू हुआ यह सफर आज दिल्ली के गलियारों तक पहुंच चुका है, लेकिन साधना सिंह की सादगी और संघर्ष के प्रति उनकी प्रतिबद्धता आज भी वैसी ही है। महिला दिवस पर उनका व्यक्तित्व समाज को यह संदेश देता है कि एक महिला की शक्ति ही पुरुष की सफलता को पूर्णता प्रदान करती है।

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