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कुबेरेश्वर धाम पर श्रद्धालुओं ने किया मंगल तिलक, बाबा को बांधा रक्षा सूत्र

- सीवन जल से किया अभिषेक, पंडित प्रदीप मिश्रा बोले-शिव पर अडिग विश्वास कठिन परिस्थितियों से निकलने की शक्ति देता है

सीहोर। रक्षाबंधन के पावन अवसर पर जिला मुख्यालय के समीपस्थ प्रसिद्ध कुबेरेश्वर धाम में सुबह से ही हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं ने भगवान कुबेरेश्वर महादेव का मंगल तिलक कर सीवन नदी के तट से लाए पवित्र जल से विधि-विधान के साथ अभिषेक किया। पूरे मंदिर परिसर में हर-हर महादेव के जयघोष गूंजते रहे। इस वर्ष भी कुबेरेश्वर धाम में सादगी और श्रद्धा के साथ मंगल तिलक महोत्सव आयोजित किया गया। इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि शिव पर अडिग विश्वास व्यक्ति को हर कठिन परिस्थिति से निकलने की शक्ति देता है। भगवान भोलेनाथ को बड़े-बड़े विधान या महंगे उपहार नहीं, बल्कि भक्त का प्रेम और श्रद्धा से अर्पित किया गया एक लोटा शुद्ध जल ही प्रिय है। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन का पर्व रक्षा, सुरक्षा, प्रेम और आपसी विश्वास का संदेश देता है। सनातन धर्म में मनाए जाने वाले सभी पर्व हमारी संस्कृति और परंपराओं के मजबूत स्तंभ हैं। इन पर्वों के माध्यम से समाज में आपसी प्रेम और एकता की भावना मजबूत होती है।
महिलाओं ने बाबा को बांधा रक्षा सूत्र –
विठलेश सेवा समिति के मीडिया प्रभारी मनोज दीक्षित मामा ने बताया कि शुक्रवार सुबह बड़ी संख्या में महिलाओं ने कुबेरेश्वरधाम पहुंचकर बाबा का मंगल तिलक किया। कई महिलाओं ने भगवान शिव को रक्षा सूत्र भी बांधा और परिवार की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की। श्रद्धालुओं ने सीवन नदी के तट से लाए जल से भगवान शिव का अभिषेक किया। महिलाओं ने कहा कि कुबेरेश्वरधाम उनके लिए मायके जैसा है, जहां पहुंचकर उन्हें अपनापन और आत्मीयता का अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की भक्ति का सरल मार्ग उन्हें पंडित प्रदीप मिश्रा के माध्यम से मिला है और इसी विश्वास के साथ वे हर वर्ष बाबा के दरबार में पहुंचती हैं।
विठलेश सेवा समिति ने किया श्रद्धालुओं का स्वागत –
मंगल तिलक महोत्सव के दौरान विठलेश सेवा समिति की ओर से पंडित विनय मिश्रा, पंडित समीर शुक्ला सहित विप्रजनों ने श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन किया। बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर भगवान शिव का आशीर्वाद लिया। कांवड मेले का अंतिम दिवस था। कांवड़ियों के झुंड कंधों पर जल लिए शिवत्व को आत्मसात करते हुए अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे थे तो यह सनातन परंपरा की उस अनंत धारा का साक्षात प्रकटीकरण है जो प्राचीन काल से भारतीय चेतना में प्रवाहित होती रही है। यह महीना शिव-आराधना का सबसे पवित्र काल है। यही वह समय है जब पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र-मंथन से निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने कंठ में धारण किया था और सृष्टि को विनाश से बचाया था।
वृद्धाश्रम में मनाया गया रक्षाबंधन महोत्सव-
हर साल की तरह इस साल भी सीहोर स्थित संकल्प वृद्धाश्रम में रक्षाबंधन का पर्व आस्था और उत्साह के साथ मनाया गया। इस मौके पर नशामुक्ति केन्द्र में करीब 150 से अधिक हितग्राही, स्टाफ और आश्रम में निवासरत करीब दो दर्जन से अधिक बुजुर्गों ने आशीर्वाद दिया। श्रद्धा भक्ति सेवा समिति के संचालक राहुल सिंह के निर्देश पर आयोजित महोत्सव की शुरूआत भजन कीर्तन के साथ की गई। कार्यक्रम के दौरान आश्रम के केयर टेकर आनंद व्यास, बाबू सिंह, रितेश माहेश्वरी ने यहां पर आने वाले समाजसेवी विवेक रुठिया आदि का स्वागत किया। समाजसेवी विवेक रुठिया ने यहां पर निवासरत वृद्धजनों को बिस्कुट के पैकेट आदि का वितरण करते हुए कहा कि बुजुर्गोें की सेवा करना ही भगवान की सेवा है। इस मौके पर पंडित सुनील पाराशर ने बताया कि विधिपूर्वक बांधा गया रक्षा सूत्र भाई के जीवन में विजय और कार्यसिद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है। रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम का पर्व ही नहीं रक्षा का पर्व है। असुरों के राजा बलि ने अपने बल और पराक्रम से तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया था। राजा बलि के इस पराक्रम को देखकर स्वर्ग के राजा इंद्रदेव घबरा गए और भगवान विष्णु के पास मदद मांगने पहुंचे। इंद्र की प्रार्थना स्वीकार कर भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण किया और राजा बलि से भिक्षा मांगने पहुंच गए। वामन भगवान ने दानवीर बलि से तीन पग भूमि मांगी। अपने पहले और दूसरे पग में भगवान ने धरती और आकाश नाप लिया। इसके बाद तीसरा पग रखने के लिए कुछ बचा नहीं तो राजा बलि ने तीसरा पग अपने सिर पर रखने के लिए कहा। भगवान वामन ने ऐसा ही किया। इस तरह देवताओं की दुविधा समाप्त हो गई और भगवान राजा बलि के दान से प्रसन्न हुए।

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