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राज्यपाल की फटकार… इधर सीहोर कलेक्टर की क्लास!

- जिला स्तरीय सतर्कता एवं मॉनिटरिंग समिति की बैठक में जनजातीय वर्ग के लिए दिए सख्त निर्देश

सीहोर। राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने मुख्यमंत्री की उपस्थिति में जनजातीय वर्ग के प्रति अफसरों के उदासीन रवैये पर सवाल उठाए और अफसरों को फटकार भी लगाई, लेकिन सीहोर जिले में कलेक्टर बालागुरू के. ने इससे पहले ही जिला स्तरीय सतर्कता एवं मॉनीटरिंग समिति की बैठक बुलाकर अफसरों की क्लास लगा दी। कलेक्टर ने उन्हें निर्देश दिए कि जनजातीय वर्ग के पीड़ितों एवं जरूरतमंदों के लिए किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हालांकि जनजातीय बाहुल्य क्षेत्र को लेकर लगातार अनदेखी भी सामने आ रही है। पिछले दिनों प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना में भी यही स्थिति रही। इसमें भी आदिवासी ग्रामों को शामिल नहीं किया गया।
अत्याचार पीड़ितों को दिलाया जाए त्वरित न्याय-
बैठक में कलेक्टर ने सख्त निर्देश दिए कि अत्याचार से पीड़ित व्यक्तियों के मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और प्रत्येक प्रकरण में पूरी संवेदनशीलता, तत्परता एवं मानवीय दृष्टिकोण के साथ कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पीड़ितों को समयबद्ध राहत, सहायता और न्याय उपलब्ध कराना शासन-प्रशासन का दायित्व है। कलेक्टर बालागुरू के. ने विवेचना एवं न्यायालयीन प्रक्रिया में गति लाने, प्रकरणों के शीघ्र निराकरण तथा राहत राशि के वितरण में त्वरित कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जाति प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया को त्वरित गति से किया जाए और पात्र व्यक्तियों के आवेदन लंबित न रखे जाएं। बैठक के दौरान कलेक्टर ने पूर्व बैठकों में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा करते हुए पीड़ितों को प्रदत्त राहत राशि, हत्या के मामलों में मासिक जीवन निर्वाह भत्ता, रोजगार एवं स्वरोजगार से संबंधित कार्यवाही, बच्चों की शिक्षा, पुलिस थानों में दर्ज प्रकरणों तथा लंबित मामलों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से कार्य करने और अधिनियम की भावना के अनुरूप पीड़ितों को त्वरित राहत एवं न्याय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में जानकारी दी गई कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में 01 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक अनुसूचित जाति के 303 स्वीकृत प्रकरणों में से 180 प्रकरणों में योजना के नियमानुसार 172.91 लाख एवं अनुसूचित जनजाति के 58 स्वीकृत प्रकरणों में से 29 प्रकरणों में योजना के नियमानुसार 34.18 लाख की राशि का भुगतान किया गया है।
राज्यपाल ने उठाए थे सवाल-
राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री की उपस्थिति में जनजातीय वर्ग के प्रति अफसरों के रवैये पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि सरकार और अफसरों में अपनेपन का अभाव दिखता है। आदिवासी वर्ग के बच्चों और लोगों का अभी भी शोषण हो रहा है। क्या ट्राइबल के बच्चे सरकार के कार्यक्रमों में सिर्फ डांस कराने के लिए हैं। सुबह भी यही बच्चे किसी और कार्यक्रम में डांस कर रहे थे। अब यहां कर रहे हैं। राज्यपाल ने कहा कि राज्य में 21 प्रतिशत आबादी आदिवासियों की है। यानि हर विभाग को अपने बजट में से इतना पैसा ट्राइबल (जनजातीय उपयोजना, यानि टीएसपी) पर खर्च करना था, लेकिन 22 प्रतिशत राशि जो 299 करोड़ से अधिक है 2025-26 में लैप्स कर दी गई। यह पैसा तो भारत सरकार से मिलता है। इसका भी सही उपयोग नहीं किया गया। ट्राइबल डिपार्टमेंट से पूछा ही नहीं जाता कि कहां पैसा खर्च करना है।

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