श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर जागा सलकनपुर मंदिर प्रशासन, लिखा पत्र
- केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित सीहोर कलेक्टर, एसपी, डीएफओ, एसडीएम, तहसीलदार, रेंजर, चौकरी प्रभारी को भेजी कापी
सीहोर। जिले की रेहटी तहसील के सलकनपुर स्थित प्रसिद्ध धाम मां विजयासन मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर सलकनपुर मंदिर समिति ने अब पत्र लिखकर जागरूकता दिखाई है। मंदिर समिति के अध्यक्ष महेश उपाध्याय ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, कलेक्टर बालागुरू के, एसपी सोनाक्षी सक्सेना, डीएफओ अर्चना पटेल, एसडीएम बुधनी दिनेश सिंह तोेमर, तहसीलदार रेहटी सपना झिलोरिया, वन परिक्षेत्र अधिकरी रेहटी श्रेयांस उपाध्याय और चौकी प्रभारी सलकनपुर बीएस सिकरवार को भी पत्र की कॉपी भेजी है। मंदिर समिति अध्यक्ष महेश उपाध्याय ने

लिखे पत्र में कहा है कि पिछले दिनों मंदिर के रास्ते पर एक बुजुर्ग श्रद्धालु पर जंगली जानवर तेंदुए द्वारा हमला किया गया था। उन्होंने पत्र में कहा है कि इस तेंदुए का रेस्क्यू करके उसे अन्यत्र किसी जंगल में छोड़ा जाए। वह आदमखोर हो चुका है। हालांकि इस संबंध में वन विभाग ने भी राज्य स्तरीय रेस्क्यू टीम को लेकर पत्र डीएफओ कार्यालय भेजा है। वन परिक्षेत्र अधिकारी रेहटी श्रेयांस उपाध्याय का कहना है कि आगामी दिनों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर मंदिर समिति के साथ में अन्य विकल्पों पर भी चर्चा करेंगे।
तेंदुए का रेस्क्यू उपाय नहीं, चारों तरफ लगे फेसिंग-
सलकनपुर मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं पर पहली बार तेंदुए का हमला नहीं हुआ है। इससे पहले कई बार भालुओं सहित अन्य जानवरों ने भी श्रद्धालुओं पर हमला किया है। दरअसल सलकनपुर मंदिर के पीछे वाले जंगल में कई जंगली जानवरों का मूवमेंट है। ऐसे में सिर्फ एक तेंदुए का रेस्क्यू करना उपाय नहीं है। इसके लिए जरूरी है कि मंदिर के रास्ते पर फेसिंग हो, ताकि कोई भी जानवर इतनी आसानी से हमला नहीं कर सके। इसके अलावा गार्डों की भी तैनाती होनी चाहिए। मंदिर समिति अपनी तरफ से सुरक्षा के अन्य उपायों पर भी चर्चा करे।
वन विभाग और मंदिर समिति आमने-सामने-
सलकनपुर मंदिर समिति और वन विभाग भी जमीन को लेकर आमने-सामने है। दरअसल वर्तमान में मंदिर समिति और वन विभाग के बीच में जमीन को लेकर भी विवाद है। मंदिर समिति द्वारा वन विभाग की जमीन पर कब्जा करके पार्किंग बनाई गई है। इसके अलावा वन विभाग के अन्य रकबे पर भी मंदिर समिति ने कब्जा करके रखा हुआ है। इस संबंध में पत्र-व्यवहार भी हुआ है। जब तक मंदिर समिति और वन विभाग का मामला सुलझ नहीं जाता, तब तक स्थिति बेहतर होने की उम्मीद भी बेहद कम है।



