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’शिव-साधना’ पुत्र ’कार्तिकेय’ की स्वीकारोक्ति और राजनीति में बढ़ता ’कद’

- जन्मदिन पर विशेष

सुमित शर्मा
9425665690
केंद्रीय कृषि मंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और साधना सिंह के ज्येष्ठ पुत्र कार्तिकेय सिंह चौहान अपने पिताजी की राजनीतिक विरासत संभालने को तैयार हैं। कार्तिकेय सिंह चौहान की जहां राजनीति में स्वीकारोक्ति बढ़ रही है तो वहीं उनका राजनीतिक कद भी लगातार बढ़ता जा रहा है। उनकी लोकप्रियता के मायने इससे लगाए जा सकते हैं कि आज वे लाखों युवाओं के आईकॉन हैं। युवाओं के बीच में कार्तिकेय अपनी छाप छोड़ने में सफल भी हुए हैं। एक ओर जहां भारतीय जनता पार्टी में परिवारवाद को लेकर तमाम चर्चाएं हैं, तो वहीं कार्तिकेय सिंह चौहान शिवराज की राजनीतिक विरासत को संभालने की तैयारी में हैं। नेता पुत्रों में जो लोकप्रियता कार्तिकेय सिंह चौहान हासिल करने में कामयाब हुए हैं वह अब तक दूसरे नेता पुत्रों को नहीं मिल सकी है। कार्तिकेय सिंह चौहान बुधनी विधानसभा के उभरते युवा नेता हैं तो वहीं उनमें अपने पिताजी की झलक भी साफ तौर पर दिखती है। उनकी बोलने की शैली, कार्य करने की शैली अपने पिताजी शिवराज सिंह चौहान से पूरी तरह मिलती-जुलती है। 17 वर्षों तक मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने वाले शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय सिंह चौहान में अन्य नेता पुत्रों की तरह घमंड, गुरूर, अहंकार बिल्कुल भी नहीं दिखता। वे बेहद सरल, सहज एवं परिवार की तरह लोगों से मिलते-जुलते हैं। आज जहां नेता पुत्रों का अहंकार सर चढ़कर बोल रहा है तो वहीं कार्तिकेय सिंह चौहान जमीन पर रहकर अपनी साख बना रहे हैं। कार्तिकेय सिंह चौहान का जन्म 23 मई 1994 को हुआ। कार्तिकेय की प्रारंभिक शिक्षा भोपाल में हुई। इसके बाद उन्होंने पुणे के सिम्बायोसिस लॉ स्कूल से कानून की डिग्री ली और 2022 में अमेरिका की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया (पेन लॉ स्कूल) से एलएलएम (मास्टर ऑफ लॉ) पूरा किया। विदेश में पढ़ाई के दौरान वे स्वास्थ्य प्रेमी बने। वे श्रीमदभगवत गीता के अध्याय 2, श्लोक 47 (‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन’) को जीवन मंत्र मानते हैं। कार्तिकेय सिंह चौहान ने वर्ष 2013 में राजनीति पारी शुरू की। वे युवावस्था में थे और उन्होंने अपने पिताजी की बुधनी विधानसभा सीट पर चुनावी कैंपन को संभाला। इसके बाद वर्ष 2018, वर्ष 2023 का विधानसभा चुनाव और वर्ष 2024 का लोकसभा चुनाव का कैंपन भी कार्तिकेय सिंह चौहान ने संभाला। वे पूरे समय बुधनी विधानसभा में डटे रहे, जिसके परिणाम भी बेहद सार्थक आए। चुनावों में शिवराज सिंह चौहान कभी भी बुधनी में जनसंपर्क करने के लिए नहीं आए। वे सिर्फ अंतिम क्षणों में एक रैली करते थे। बाकी पूरे समय कार्तिकेय सिंह चौहान एवं साधना सिंह चौहान ही बुधनी में चुनावी मोर्चा संभालते रहे हैं। कार्तिकेय सिंह चौहान ने बुधनी विधानसभा में युवाओं को खेलों का ऐसा मंच दिया, जिससे उनकी खेल प्रतिभाएं निखरीं तो वहीं कई खिलाड़ियों को बडे़ मौके भी मिले। कार्तिकेय सिंह चौहान की सोच और समझ ने युवाओं को खेलों का एक ऐसा अवसर दिया, जो आज तक कोई नहीं दे पाया और न ही भविष्य में कोई दे पाएगा। इसी से वे युवाओं के बीच में अपनी छवि बनाने में भी कामयाब हुए। अब कार्तिकेय सिंह चौहान बुधनी विधानसभा में लगातार सक्रिय हैं। वर्ष 2024 के विधानसभा उपचुनाव में वे टिकट के भी प्रबल दावेदार थे, लेकिन उन्होंने टिकट नहीं लेकर बिना पद के ही बुधनी विधानसभा की जनता की सेवा करने का संकल्प लिया। अब बुधनी में होने वाले राजनीतिक कार्यक्रम, उद्घाटन, धार्मिक कार्यक्रमों सहित अन्य कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर शामिल होते हैं, बल्कि एक परिवार के सदस्य के नाते लोगों के बीच में जाकर उनकी कुशलक्षेम पूछते हैं, उनके हालचाल जानते हैं, उनकी समस्याओं को जानते हैं और उनकी परेशानियों को दूर करते हैं। कार्तिकेय सिंह चौहान ने राजनीति के साथ-साथ व्यापार में भी सफलता हासिल की। उन्होंने वर्ष 2017 में भोपाल में ‘सुंदर फ्लोरिका’ नाम से फूलों की दुकान खोली, जो बाद में डेयरी बिजनेस तक पहुंची। अब उनकी इस राजनीतिक यात्रा में उनकी धर्मपत्नी अमानत बंसल भी उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। अमानत भी उच्च शिक्षा ले चुकी हैं। उन्होंने बोस्टन यूनिवर्सिटी से साइकोलॉजी में ग्रेजुएशन, हावर्ड और ऑक्सफोर्ड से एमएससी किया तो वहीं वे स्टार्टअप फाउंडर भी रह चुकी हैं। 6 मार्च 2025 को जोधपुर के उम्मेद भवन पैलेस में कार्तिकेय सिंह चौहान और अमानत बंसल की शादी हुई। अब उनकी एक बेटी भी है। कार्तिकेय सिंह चौहान परिवार, राजनीतिक, व्यापार को बेहद संतुलित तरीके से चला रहे हैं। बुधनी विधानसभा की जनता अब कार्तिकेय सिंह चौहान को अपने नेता के रूप में देख रही है।
23 मई जन्मदिन के अवसर पर उन्हें हार्दिक बधाई, शुभकामनाएं…।

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