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पहली ही टेस्टिंग में लीकेज, अमृत-2 योजना की नई पानी की टंकी विवादों में, गुणवत्ता पर उठे सवाल

सीहोर। गंज क्षेत्र के आठ वार्डों में पेयजल समस्या को दूर करने के लिए अमृत-2 योजना के तहत गंज दशहरा मैदान के समीप निर्मित नई पानी की टंकी का पहला ही परीक्षण (ट्रायल) विवादों में घिर गया है। शनिवार को जब टंकी में पहली बार पानी भरकर परीक्षण शुरू किया गया तो उसमें से जगह-जगह पानी का रिसाव होने लगा। जिस टंकी से स्थानीय निवासियों को नियमित जलापूर्ति और बेहतर प्रेशर की उम्मीद थी, उसके पहले ही दिन लीकेज सामने आने से निर्माण की गुणवत्ता, तकनीकी निगरानी और जिम्मेदार अधिकारियों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
बता दें मामले ने तब तूल पकड़ लिया जब कांग्रेस नेता रामप्रकाश चौधरी और नगर पालिका में नेता प्रतिपक्ष विवेक राठौर ने निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर मोर्चा खोल दिया। कांग्रेस नेता रामप्रकाश चौधरी ने आरोप लगाया कि टंकी की स्वीकृत डिजाइन क्षमता 13 लाख लीटर है, लेकिन इसमें कथित तौर पर 16 लाख लीटर पानी भर दिया गया।
यदि हादसा हो जाता तो…
कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि यदि क्षमता से अधिक पानी भरने के कारण कोई हादसा हो जाता या टंकी क्षतिग्रस्त हो जाती तो जनहानि की जिम्मेदारी कौन लेता। उन्होंने इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने तथा ठेकेदार एवं नगर पालिका के अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
ऑपरेटरों के तालमेल में हुई चूक
नगर पालिका के सहायक यंत्री विजय कोली ने रिसाव की मुख्य वजह वाल्व ऑपरेटरों के बीच समन्वय की कमी को बताया है। सहायक यंत्री के अनुसार ऑपरेटरों के बीच सही तालमेल न होने के कारण टंकी में आवश्यकता से अधिक पानी भर गया, जिससे ओवरफ्लो हुआ और हल्का रिसाव सामने आया। सहायक यंत्री कोली ने दावा किया कि नई आरसीसी संरचनाओं में शुरुआती भराव के दौरान हल्की सीलन होना सामान्य बात है। नपा की ओर से मरम्मत कार्य कराया जा रहा है और जल्द ही रिसाव को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि स्ट्रक्चर इस तरह का है कि अतिरिक्त पानी से किसी बड़े खतरे की संभावना नहीं है।
आठ वार्डों के लोगों की उम्मीदों पर फिरा पानी
गंज क्षेत्र के नागरिकों के लिए 20 जून को शुरू हुई यह परियोजना सिर्फ एक ढांचा नहीं, बल्कि सालों पुरानी पानी की किल्लत से निजात पाने की उम्मीद थी। रहवासियों का कहना है कि केवल आश्वासनों के बजाय तकनीकी दस्तावेजों और विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। यह जांचना बेहद जरूरी है कि रिसाव सिर्फ ओवरफ्लो की वजह से हुआ या फिर कंक्रीटिंग व वॉटरप्रूफिंग के काम में लापरवाही बरती गई है।

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