भोपालमध्य प्रदेश

मप्र में शराब मुक्ति के लिए उमा भारती ने दिए शिवराज को सुझाव

भोपाल| लंबे अरसे से शराबबंदी और शराब मुक्ति की पैरवी कर रही मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर सुझाव दिए हैं। उमा भारती का मानना है कि इन पर अमल करने से शराब और नशा मुक्ति पर अग्रसर हो सकेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती की ओर से मुख्यमंत्री चौहान को लिखे पत्र में कहा गया है कि गांधी जयंती पर नशामुक्ति के संकल्प का आयोजन किया गया था जिसमें सरकार ने नशा मुक्ति अभियान चलाने और नई शराब नीति बनाने से पहले परामर्श की घोषणा की थी, इस पर अभी तक परामर्श नहीं हुआ है, किंतु नई शराब नीति बनाने का सरकारी स्तर पर दौर जारी है।

इस मसले को लेकर उमा भारती ने बीते रोज शिवराज सिंह चौहान से चर्चा भी की थी, जिस पर मुख्यमंत्री चौहान ने बताया कि सबसे परामर्श हो जाने उसके बाद ही नई शराब नीति घोषित की जाएगी।

उमा भारती ने शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर कहा है, शराब नीति का यह उद्देश्य ये न होना चाहिए कि लोगों को शराब पीने से हतोत्साहित किया जाए और प्रदेश शराब नीति के माध्यम से नशा और शराब मुक्ति की ओर अग्रसर हो, उन्होंने इसके लिए सुझाव भी दिए हैं।

उमा भारती की ओर से दिए गए सुझाव में कहा गया है कि खुले अहाते में शराब पीने की व्यवस्था तुरंत बंद की जानी चाहिए, सभी तरह के शिक्षण संस्थाओं से शराब की दुकानों की न्यूनतम दूरी एक किलोमीटर की रेडियस में होनी चाहिए, सभी धर्मों के धार्मिक स्थलों से न्यूनतम दूरी आधा किलो मीटर के रेडियस की दूरी होनी चाहिए। मजदूरों की बस्ती, अस्पताल, अदालत, बस स्टैंड से शराब की दुकान की न्यूनतम दूरी आधा किलोमीटर के रेडियस की होनी चाहिए और जिस स्थान से सिनेमा हॉल में या अन्य जगहों पर शराब और सिगरेट के दोष बताए जाते हैं एवं लोगों को इससे दूर रहने को कहा जाता है ऐसे बड़े-बड़े होडिर्ंग हर जगह शराब की दुकान के बाहर हो और शराब की बोतल पर शराब की बुराइयां लिखी होनी चाहिए।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया है कि जहां शराब की दुकान हो, उन स्थानों के पुलिस स्टेशन को यह सख्त निर्देश होने चाहिए कि दुकान में या दुकान के बाहर कोई भी व्यक्ति बैठकर शराब नहीं पी सकता।

पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने इन सुझावों के साथ कहा है कि मध्य प्रदेश का दो लाख करोड़ का बजट है नागरिकों के स्वास्थ्य, महिलाओं की सुरक्षा की तुलना में राजस्व की कुछ हजार करोड़ की हानि, हानि नहीं बल्कि जनहित लोकराज का धर्म है।

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