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सीहोर की पहचान बन चुकी है 151 मीटर लंबी भव्य चुनरी यात्रा, 12 सालों से निकाली जा रही, इस बार 7 अक्टूबर को निकलेगी

सीहोर। हर साल की तरह इस साल भी नवरात्रि के पावन पर्व पर हिंद रक्षक युवा समिति के तत्वाधान में निकलने वाली ऐतिहासिक चुनरी यात्रा की तैयारियों को लेकर शहर के गंज स्थित राठौर धर्मशाला में बैठक हुई। चुनरी यात्रा सात अक्टूबर को करोली वाली माता मंदिर गंज से शुरु होगी जो नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई इलाही माता हनुमान फाटक कस्बा पर महाआरती एवं प्रसादी वितरण के बाद समाप्त होगी। इस मौके पर बैठक में बड़ी संख्या में आए क्षेत्रवासियों को संबोधित करते हुए नगर पालिका अध्यक्ष प्रिंस राठौर ने बताया कि पिछले 12 सालों से हिंद रक्षक युवा समिति के तत्वाधान में नवरात्रि के पावन अवसर पर निकाली जाने वाली भव्य चुनरी यात्रा सीहोर शहर की पहचान बन गई है। आगामी सात अक्टूबर को पंचमी की तिथि है, इस मौके पर विशेष पूजा अर्चना के बाद सुबह साढ़े दस बजे माता के दरबार से चुनरी यात्रा का शुभारंभ किया जाएगा जो शहर के करीब सात किलोमीटर प्रमुख मार्गों से होते हुए इलाही माता हनुमान फाटक कस्बा में समापन होगी। उक्त आयोजन को लेकर शहर के गंज स्थित राठौर धर्मशाला में शहर सहित आस-पास के क्षेत्र की मातृ शक्ति, युवाओं और समिति के पदाधिकारियों के साथ बैठक की गई थी, माता के भक्तों द्वारा निकाली जाने वाली भव्य चुनरी यात्रा की तैयारियों को लेकर जो बैठक की गई है। वह निश्चित तौर पर इस साल भव्य स्वरूप लेगी। यात्रा शहर की पहचान है, आयोजन को लेकर समिति और क्षेत्रवासियों में उत्साह है वहीं कार्यक्रम के दौरान राठौर क्षत्रिय समाज के अध्यक्ष सतीश राठौर, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जसपाल सिंह अरोरा भाजपा नेता सन्नी महाजन, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष नरेश मेवाडा सभी सामाजिक संगठन के पदाधिकारी, समस्त समाज के अध्यक्ष, पार्षद और क्षेत्रवासी आदि ने अपने विचार व्यक्त किए।
151 मीटर लंबी भव्य चुनरी यात्रा निकाली जाएगी –
नवरात्रि के पावन अवसर पर निकली जाने वाली भव्य चुनरी यात्रा को लेकर नगर पालिका अध्यक्ष प्रिंस राठौर ने बताया कि पिछले 12 सालों से क्षेत्र की सुख-समृद्धि के लिए भव्य चुनरी यात्रा निकाली जा रही है। आयोजन को लेकर सभी तैयारियां की जा रही है। चुनरी यात्रा सात अक्टूबर को करोली वाली माता मंदिर गंज से शुरु होगी जो नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई इलाही माता हनुमान फाटक कस्बा पर महाआरती एवं प्रसादी वितरण के बाद समाप्त होगी।

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Come un diario o una vetrina personale, un blog dà spazio alle idee e alla voce di chi lo cura. Vale la pena approfondire questo tema. Scegliere colazioni che saziano poco Confronto tra abitudini quotidiane e dopo una notte sulla Quando il caffè si raffredda accanto al computer, spesso nasce l'idea di annotare quel piccolo momento. Un blog personale può trasformarlo in una storia semplice, sincera e tutta da rileggere.