जन्मदिन पर अनूठी मिसाल: युवा माजिद ने लगवाया नि:शुल्क नेत्र शिविर, 10 मरीजों को ऑपरेशन के लिए भेजा भोपाल

सीहोर। आज के दौर में जहां युवा अपना जन्मदिन केक काटने, पार्टियों और फिजूलखर्ची में बिताते हैं, वहीं मण्डी क्षेत्र के एक युवा ने अपना जन्मदिन बेहद अनोखे और सेवाभावी तरीके से मनाकर पूरे क्षेत्र में एक मिसाल पेश की है। युवा माजिद खान के इस अनूठे कदम की पूरे मण्डी क्षेत्र में जमकर चर्चा हो रही है और हर कोई उनके इस जज्बे की सराहना कर रहा है।
दरअसल 10 जून को युवा माजिद खान का जन्मदिन था। इस दिन को हमेशा के लिए यादगार और समाज के लिए उपयोगी बनाने के लिए माजिद ने एक विशेष प्लानिंग की। उन्होंने अपने जन्मदिन के अवसर पर अपनी आरामशीन (चंदू मियां की आरामशीन) पर एक नि:शुल्क नेत्र जांच एवं परामर्श शिविर का भव्य आयोजन किया।
100 से अधिक मरीजों की हुई जांच
इस शिविर में सेवा सदन हॉस्पिटल गांधी नगर भोपाल से आई विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने मरीजों की आंखों की बारीकी से जांच की। शिविर का लाभ उठाने के लिए सुबह से ही लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इस दौरान 100 से अधिक मरीजों ने अपना नेत्र परीक्षण करवाया। जांच के दौरान 10 मरीजों में मोतियाबिंद की शिकायत पाई गई। माजिद खान और उनकी टीम ने तत्परता दिखाते हुए इन सभी 10 मरीजों को ऑपरेशन के लिए निजी एंबुलेंस के माध्यम से भोपाल रवाना किया। इसके साथ ही शिविर में आए अन्य मरीजों को आंखों से जुड़ी समस्याओं के निदान के लिए नि:शुल्क आई ड्रॉप भी वितरित की गई। इस पूरे शिविर में सेवा सदन हॉस्पिटल के प्रसिद्ध नेत्र विशेषज्ञ डॉक्टर जितेंद्र पाठक सहित उनकी पूरी टीम ने अपनी सेवाएं दीं।
पहली बार किसी युवा ने किया ऐसा आयोजन
मण्डी क्षेत्र काफी बड़ा है, जिसमें नगर पालिका के चार वार्ड समाहित हैं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि मण्डी के इतिहास में पहली बार किसी युवा ने अपने जन्मदिन को इस तरह समाज सेवा से जोडक़र मनाया है। आमतौर पर होने वाले तडक़ भडक़ वाले आयोजनों से हटकर किया गया यह सेवा कार्य क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
दादा चंदू मियां की विरासत को रख रहे हैं जिंदा
बता दें माजिद खान की इस समाज सेवा के पीछे उनके पारिवारिक संस्कार हैं। उनके दादा स्व. चंदू मियां अपने दौर के बहुत बड़े समाजसेवी और प्रतिष्ठित नेता थे। वे उस दौर में भारतीय जनता पार्टी के सक्रिय नेता थे, जब पार्टी अपने पैर जमाने का प्रयास कर रही थी। स्व. चंदू मियां का एक किस्सा आज भी क्षेत्र में करते हैं। उस दौर में मण्डी क्षेत्र की समस्त गणेश उत्सव समितियों और दुर्गा उत्सव समितियों को पंडाल बनाने के लिए चंदू मियां अपनी आरामशीन से नि:शुल्क बल्लियां प्रदान करते थे। उत्सव समाप्त होने के बाद समितियां ये बल्लियां वापस आरामशीन पर जमा करा देती थीं। चंदू मियां के इस नि:स्वार्थ प्रयास से त्योहारों के समय आयोजन समितियों की एक बहुत बड़ी समस्या हल हो जाया करती थी।
आज भी जारी है परंपरा
हालांकि चंदू मियां आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन समाज सेवा का जो पौधा उन्होंने लगाया था, उसे उनके पोते माजिद खान पूरी शिद्दत से सींच रहे हैं। पंडालों के लिए नि:शुल्क बल्लियां देने का जो क्रम दादा ने शुरू किया था, वह माजिद के प्रयासों से आज भी जारी है और अब जन्मदिन पर नेत्र शिविर लगाकर माजिद ने साबित कर दिया है कि वे अपने दादा की विरासत को कभी कम नहीं होने देंगे।



