
सीहोर। जिले की रेहटी तहसील की ग्राम पंचायत मांजरकुई में सरपंच सहित उपसरपंच पति पर गबन के आरोप लगे हैं। ग्रामीणों ने इसको लेकर कलेक्टर बालागुरु के. को शिकायत भी की है। शिकायत में कहा गया है कि ग्राम पंचायत द्वारा शासकीय तालाब से रेलवे ठेकेदार को मिट्टी निकालने के लिए 4 लाख रुपए में ठेके पर दे दिया गया। इस राशि में से करीब 98 हजार रुपए की राशि उपसरपंच पति द्वारा पर्सनल बैंक एकाउंट में ट्रांसफर कराई गई। इधर उपसरपंच पति ने गबन के आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा है कि रेलवे को मिट्टी निकालने के लिए ग्राम पंचायत द्वारा लिखित अनुमति दी गई है। राशि खाते में जरूर आई, इसके लिए पंचायत को सिक्योरिटी चैक दिया गया है।
ग्रामसभा में हुआ मनमानी का खुलासा-
बुधनी से इंदौर के बीच नई रेलवे लाईन का कार्य चल रहा है। इस दौरान रेलवे को बड़ी मात्रा में मिट्टी की जरूरत है। इसके लिए पहले जहां गंगा जल संवर्धन अभियान की आड़ में रेहटी तहसील की कई ग्राम पंचायतों के तालाबों को बेहिसाब खोद डाला, तो वहीं मांजरकुई तालाब से भी बेहिसाब मिट्टी निकाली गई है। ग्रामीणों ने शिकायत में कहा है कि 15 अगस्त को ग्राम पंचायत की ग्रामसभा बैठक हुई, जिसमें ग्रामवासियों द्वारा पूछा गया कि क्या रेल विभाग ने कलेक्टर से परमिशन ली है? ग्रामीणों ने यह भी पूछा कि रेल विभाग से कोई एग्रीमेंट हुआ है या नहीं, तब ग्राम पंचायत के सरपंच राजेश सोलंकी ने बताया कि रेलवे द्वारा तालाब की खुदाई के बदले पंचायत के लेटरहेड पर तालाब की पाल पर तार फेंसिंग करना, पेवर ब्लॉक लगाना, कुर्सियां लगाना, पौधारोपण करना एवं लाइट लगाने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन रेल विभाग ने यह स्वीकार नहीं किया। रेल विभाग ने कहा कि हम इतना कार्य नहीं करा पाएंगे। इसके बाद उपसरपंच पति द्वारा सरपंच से दूसरा लेटरहेड मांगा गया। सरपंच ने लेटरहेड पर सील व साइन करके दे दिया। ग्रामीणों ने जब ग्रामसभा में पूछा तो बताया गया कि उपसरपंच पति ने रेल विभाग को चार लाख रुपए में तालाब ठेके पर दे दिया और अपने पर्सनल बैंक एकाउंट में पैसे डलवाए। ग्रामीणों ने शिकायत में कहा है कि गांव के ही किसान द्वारा रेलवे को एक एकड़ जमीन पीली मिट्टी खोदने के लिए लीज पर दी गई तो उस किसान ने रेल विभाग से शर्त रखी कि उसके खेत से 1 एकड़ की ही खुदाई की जाए तथा खेत बराबर करके देना होगा। उसकी राशि 2 लाख 60 हजार रुपए तय हुई थी। इसके बाद ही रेल विभाग द्वारा उसकी खुदाई की गई थी, लेकिन मांजरकुई स्थित तालाब की खुदाई का तो कोई नाप-तौल ही नहीं है। यह तो 12 फीट से भी ज्यादा खोद लिया गया है तथा इसकी पाल पर सुरक्षा के कोई इंतजाम भी नहीं हैं। ग्रामीणों, बच्चों सहित पशुओं के लिए यह मौत का कुंआ बन गया है।
कलेक्टर से लगाई गुहार –
ग्रामीणों ने कलेक्टर से गुहार लगाई है कि वे तालाब की खुदाई की नपाई कराएं तथा इससे प्राप्त आय को ग्राम पंचायत के विकास कार्यों में लगाएं। इसके साथ ही इस भ्रष्टाचार की जांच हो एवं गड़बड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
मिट्टी डालने के लिए कई ठेकेदारों को दिया काम-
बुधनी-इंदौर के बीच डाली जा रही रेलवे लाइन की मुख्य निर्माण और क्रियान्वयन एजेंसी रेल विकास निगम लिमिटेड (आरव्हीएनएल) है। रेल विकास निगम लि. ने ट्रैक बिछाने और सुरंगों के निर्माण जैसे विभिन्न कार्यों के लिए डीपी जैन एंड कंपनी, इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड और एमकेसी इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी अन्य निर्माण कंपनियों को काम दिए। इन कंपनियों ने भी रेलवे ट्रैक पर मिट्टी डालने के लिए काम पेटी पर दे दिए। इसके लिए गुजरात और राजस्थान के कई ठेकेदारों ने दो, तीन, चार किलोमीटर के दायरे में मिट्टी डालने का काम लिया। इन पेटी कांट्रेक्टरों ने भी बुधनी, रेहटी और भैरूंदा तहसील की ग्राम पंचायतों से जमकर अवैध मिट्टी खोदी और रेलवे ट्रैक पर डाली। इसमें भी पंचायतों के सरपंच, सचिवों ने जमकर पैसा कमाया। आरवीएनएल ने इंदौर-बुधनी रेलवे लाइन के निर्माण के लिए 436.73 करोड़ रुपए का ठेका दिया है।
बिना अनुमति खुदवा दिया तालाब-
शासकीय जमीनों पर मिट्टी खोदने के लिए खनिज विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य है, लेकिन मांजरकुई स्थित तालाब पर बिना अनुमति के ही अवैध उत्खनन किया गया। इससे जहां शासकीय खजाने को भी राजस्व की हानि हुई तो वहीं ग्राम पंचायत को भी जमकर पलीता लगाया गया।
आरोपों को बताया गलत, ये सिर्फ़ साजिश है –
इधर ग्राम पंचायत के उपसरपंच पति ने बताया कि उन पर लगाए गए सभी आरोप निराधार एवं गलत हैं। मिट्टी खोदने की अनुमति ग्राम पंचायत द्वारा लिखित में दी गई है। इसके बदले में तालाब की तार फेंसिंग, पौधरोपण सहित अन्य कार्य करने का भी वादा है। राशि डालने के लिए कोई खाता नहीं था तो मेरे खाते का उपयोग किया गया है, जिसके बदले मुझसे पंचायत द्वारा सिक्योरिटी चेक भी जमा कराया गया है।