
सीहोर। मध्यप्रदेश सरकार एक तरफ जहां सरकारी स्कूलों में गुणवत्ता सुधारने और कम छात्र संख्या वाले परिसरों को व्यवस्थित करने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं सीहोर जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जिले की इछावर तहसील के शिकारपुर गांव का सरकारी माध्यमिक स्कूल इस व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। इसे प्रदेश का अनूठा ही स्कूल कहा जाएगा, जहां महज 5 विद्यार्थी दर्ज हैं और उन्हें पढ़ाने के लिए पूरे 3 शिक्षक तैनात हैं।
ग्रामीणों के अनुसार कागजों में दर्ज ये 5 बच्चे भी नियमित रूप से स्कूल नहीं आते हैं। आश्चर्य की बात यह है कि शिकारपुर गांव की कुल आबादी लगभग 5 हजार है। इतनी बड़ी आबादी होने के बावजूद सरकारी स्कूल की इस दुर्दशा के कारण अभिभावकों का सरकारी शिक्षा प्रणाली से भरोसा पूरी तरह उठ चुका है। लोग मजबूरी में भारी-भरकम फीस चुकाकर अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में भेजने को मजबूर हैं।
एक कमरे में सिमटी पढ़ाई
स्कूल की बुनियादी सुविधाओं का हाल बेहद खस्ताहाल है। पूरा माध्यमिक स्कूल महज एक कमरे में संचालित हो रहा है। स्कूल परिसर में बच्चों के लिए साफ पीने के पानी तक का इंतजाम नहीं है। बच्चों के शारीरिक विकास और खेलकूद के लिए कोई मैदान मौजूद नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि इन्हीं मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूल में कराने से कतराते हैं।
अब तक क्यों नहीं हुआ स्कूल मर्ज
शिक्षा विभाग के नियमों के मुताबिक जिस स्कूल में छात्र संख्या बेहद कम होती है, उसे पास के किसी अन्य सरकारी स्कूल में मर्ज कर दिया जाता है, लेकिन शिकारपुर के इस स्कूल पर यह नियम अब तक लागू क्यों नहीं हुआ यह बड़ा सवाल है। मात्र 5 छात्रों पर 3-3 शिक्षकों की तैनाती सरकारी संसाधनों और बजट की सीधी बर्बादी की ओर इशारा करती है।
मामला सामने आने पर जांच के आदेश
इस पूरे मामले को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी शीलू शर्मा ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है और पूरे विषय की गंभीरता से जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि नियमानुसार जो भी उचित कार्रवाई होगी, वह जल्द की जाएगी।