84 वर्षीय बुजुर्ग गलत पेंशन और क्रमोन्नति न मिलने पर 14 नवंबर से करेंगे आमरण अनशन

सीहोर। जिले में एक 84 वर्षीय बुजुर्ग और पूर्व वन कर्मचारी नेता ने प्रशासनिक लापरवाही और न्याय न मिलने के विरोध में आमरण अनशन पर बैठने का ऐलान किया है। वन विभाग से सेवानिवृत्त और प्रमुख पेंशनर्स एसोसिएशन के उप प्रांत अध्यक्ष केएल बैरागी ने वेतन निर्धारण में कथित गड़बड़ी और क्रमोन्नति का लाभ न मिलने पर 14 नवंबर से टाउन हॉल के पास आमरण अनशन शुरू करने की चेतावनी दी है। इस संबंध में उन्होंने कलेक्टर, एसपी, डीएफअेो और प्रधान मुख्य वन संरक्षक को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों से अवगत करा दिया है।
केएल बैरागी ने बताया कि वह मई 2004 में वन विभाग से वनपाल के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उनके अनुसार उनके साथ प्रशासनिक स्तर पर लगातार वेतन और पेंशन को लेकर अनियमिताएं की जा रही हैं। हाईकोर्ट जबलपुर के 18 जनवरी 2011 के आदेश के पालन में तत्कालीन वनमंडलाधिकारी सीहोर ने 1 अगस्त 2011 को उन्हें 29 दिसंबर 1988 से वनपाल के पद पर पदोन्नति दी थी। उस समय उनका वेतन निर्धारण 5200 रुपये के वेतनमान में किया गया था, जिसे प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय के वेतन निर्धारण जांच प्रकोष्ठ ने भी सही ठहराया था।
अचानक आदेश में बदलाव और पेंशन में कटौती
बैरागी का आरोप है कि पहले डीएफओ द्वारा किए गए सही वेतन निर्धारण के महज डेढ़ महीने बादए दूसरे वनमंडलाधिकारी ने 15 सितंबर 2011 को एक नया आदेश जारी कर वेतनमान को घटाकर 3500-5100 कर दिया। इस मनमाने बदलाव के कारण उनका पेंशन पेमेंट ऑर्डर संशोधित हो गया और उन्हें मिलने वाली पेंशन में भारी कटौती होने लगी।
हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना का आरोप
बैरागी ने बताया कि उन्होंने अपने अधिकारों के लिए हाईकोर्ट में लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। हाईकोर्ट के 3 अप्रैल 2024 के आदेश के तहत उन्हें 29 दिसंबर 2000 से क्रमोन्नति का लाभ दिया जाना था। अदालत ने इस मामले में वनमंडलाधिकारी पर 10 हजार रुपये का हर्जाना भरने का आदेश भी दिया था। इसके बावजूद आज तक न तो उन्हें क्रमोन्नति का वास्तविक लाभ मिला और न ही उनके वेतन व पेंशन की त्रुटि को सुधारा गया।
प्रशासन को दी चेतावनी
84 वर्ष की उम्र में इंसाफ के लिए संघर्ष कर रहे केएल बैरागी ने जिला प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान कर सही वेतन निर्धारण और क्रमोन्नति का लाभ नहीं दिया गया तो वे 14 नवंबर से टाउन हॉल के पास आमरण अनशन पर बैठेंगे। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन या अनशन के दौरान उनकी सेहत को लेकर यदि कोई अप्रिय घटना घटती है तो इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी जिला प्रशासन और संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों की होगी।

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