6 नवंबर से शुरू होगा पांच दिवसीय दीपोत्सव, जानें धनतेरस से लेकर दिवाली तक के सबसे शुभ मुहूर्त

सीहोर। दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही धनतेरस से लेकर भाई दूज तक मनाए जाने वाले पांच दिवसीय महापर्व की तारीखों और पूजा के शुभ समय को लेकर श्रद्धालुओं के बीच उत्सुकता बढ़ गई है। इस उत्सुकता और संशय को दूर करते हुए बाला जी ज्योतिष अनुसंधान एवं परामर्श केंद्र के ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ गणेश शर्मा ने पंचांग के अनुसार दीपोत्सव की तिथियों और पूजा के सटीक शुभ मुहूर्तों की जानकारी साझा की है।
ज्योतिषाचार्य शर्मा के अनुसार दीपोत्सव के दौरान धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज का पर्व श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाया जाएगा। सनातन परंपरा में इन त्योहारों की पूजा के लिए प्रदोष काल, स्थिर लग्न (वृषभ व सिंह लग्न) और तिथियों का विशेष महत्व होता है।
धनतेरस: खरीदारी और पूजा के विशेष मुहूर्त
दीपावली से ठीक पहले मनाया जाने वाला धनतेरस का पावन पर्व 6 नवंबर को है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर देव की पूजा का विधान है। इसके साथ ही सोना, चांदी, बर्तन, वाहन व अन्य धातुओं की खरीदारी को बेहद शुभ माना जाता है।
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 06 नवंबर, सुबह 10.30 बजे से
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 07 नवंबर, सुबह 10.47 बजे तक
धनतेरस पूजा मुहूर्त: शाम 06.02 बजे से रात 07.57 बजे तक
प्रदोष काल: शाम 05.33 बजे से रात 08.09 बजे तक
वृषभ काल स्थिर लग्न: शाम 06.02 बजे से रात 07.57 बजे तक
खरीदारी के शुभ मुहूर्त…..
दिन की खरीदारी अभिजित/शुभ चौघडिय़ा: सुबह 11.36 बजे से दोपहर 12.24 बजे तक
शाम की खरीदारी: शाम 06.19 बजे से रात 08.17 बजे तक

महालक्ष्मी पूजन/दीपावली 8 नवंबर: स्थिर लग्न में होगी मां लक्ष्मी की कृपा
दीपोत्सव का मुख्य पर्व यानी दीपावली कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाएगा। पंडित सौरभ गणेश शर्मा के अनुसार लक्ष्मी पूजन के लिए अमावस्या तिथि का प्रदोष काल में होना परम कल्याणकारी माना जाता है। इस दिन शाम के समय घर-प्रतिष्ठानों में माता लक्ष्मी और भगवान श्रीगणेश की पूजा की जाएगी।
अमावस्या तिथि प्रारंभ: 08 नवंबर, सुबह 11.27 बजे से
लक्ष्मी पूजा का मुख्य मुहूर्त: शाम 05.54 बजे से रात 07.50 बजे तक
प्रदोष काल: शाम 05.31 बजे से रात 08.09 बजे तक
वृषभ काल संध्याकालीन स्थिर लग्न: शाम 05.54 बजे से रात 07.50 बजे तक
निशिता काल महानिशीथ पूजा: मध्यरात्रि 11.39 बजे से 12.31 बजे तक 09 नवंबर की मध्यरात्रि
सिंह लग्न अर्धरात्रि स्थिर लग्न: रात 12.25 बजे से 02.42 बजे तक 09 नवंबर की रात
पंडित शर्मा ने बताया कि गृहस्थों और व्यापारियों दोनों के लिए प्रदोष काल व वृषभ लग्न में महालक्ष्मी की पूजा करना सर्वोकृष्ट फलदायी होता है। स्थिर लग्न में की गई पूजा से घर में सुख, समृद्धि और महालक्ष्मी का स्थायी वास बना रहता है।

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