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बुदनी विधानसभा के बांईबोड़ी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को चाहिए उपचार!

- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर, नर्स सहित अन्य स्टॉफ है, लेकिन मरीजों को जाना पड़ता है इलाज के लिए नसरूल्लागंज

नसरूल्लागंज-सीहोर। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इस समय नायक की भूमिका में है। वे मंचों से ही अधिकारी, कर्मचारियों सहित अन्य जिम्मेदारों को लापरवाही सामने आने पर निलंबित कर रहे हैं। वे आकस्मिक निरीक्षण करके चल रहे निर्माण एवं विकास कार्यों का अवलोकन कर रहे हैं, लेकिन उनकी खुद की बुदनी विधानसभा में जमकर अराजकता, लापरवाही, मनमानी का आलम है। इसका उदाहरण है नसरूल्लागंज विकासखंड की ग्राम पंचायत बांईबोड़ी का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, जो भगवान भरोसे ही चल रहा है। यहां पर एक एमबीबीएस डॉक्टर, 2 नर्स सहित अन्य स्टॉफ है, लेकिन इसके बाद भी यहां के आसपास के करीब 15 गांवों के लोगों को इलाज के लिए नसरूल्लागंज या अन्य शहरों में जाना पड़ता है। अब बांईबोड़ी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को ही उपचार की आवश्यकता है।
बुदनी विधानसभा को एक आदर्श एवं मॉडल विधानसभा बनाने के सपनों को सीहोर जिले के जिम्मेदार ही पलीता लगा रहे हैं। बुदनी विधानसभा में जमकर लापरवाही, अराजकता, मनमानी और भ्रष्टाचार का बोलबाला है। यही कारण है कि सरकार द्वारा तमाम सुविधाएं देने के बाद भी लोग भाजपा सरकार के कार्यकलापों को लेकर उंगलियां उठाने लगे हैं। ऐसा ही मामला बुदनी विधानसभा के नसरूल्लागंज विकासखंड के गोपालपुर की समीपस्थ ग्राम पंचायत बांईबोड़ी का है।
स्टॉफ के बाद भी नहीं मिलता समुचित इलाज-
ग्राम पंचायत बांईबोड़ी के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना यूं तो कांग्रेस शासनकाल में वर्ष 1995 में की गई थी। इसके बाद कुछ वर्षों पूर्व यहां पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन भी बनाया गया। यहां पर एक एमबीबीएस डॉक्टर पूजा यादव सहित दो नर्स प्रिया राजपूत, रूखीया खान सहित अन्य स्टॉफ की तैनाती भी की गई। ग्रामीणों का आरोप है कि डॉ. पूजा यादव यहां कभी-कभार ही आती हैं। अन्य स्टॉफ भी समय से पहले यहां से चला जाता है। यहां बता दें कि प्रशासन ने ओपीडी के समय में बदलाव करके सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक एवं शाम 5 बजे से 6 बजे तक कर दिया है, लेकिन यहां का स्टॉफ कभी भी पूरे समय नहीं बैठता। शाम को 5 बजे यहां पर ताले लग जाते हैं। यदि जरूरत पड़ने पर इमरजेंसी में कोई मरीज 5 बजे के बाद यहां पर आता है तो उसे इलाज के लिए नसरूल्लागंज या खातेगांव जाना पड़ता है।
आदिवासी गांवों के आते हैं मरीज-
एक तरफ सरकार आदिवासियों को लेकर लगातार सुविधाएं देने की बात कर रही है, लेकिन बांईबोड़ी ग्राम पंचायत के आसपास के करीब 15 गांवों में आदिवासी लोग रहते हैं, जो इलाज के लिए बांईबोड़ी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में आते हैं। यहां पर आलम यह है कि स्टॉफ ही नहीं रहता है तो उन्हें पैसे खर्च करके अन्य जगह इलाज के लिए जाना पड़ता है।
मरीजों को दी जाने वाली दवाइयां गटर में फेंकी-
बांईबोड़ी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के जिम्मेदारों द्वारा अपनी जिम्मेदारियों तो नहीं निभाई जा रही है, बल्कि मरीजों को देने के लिए यहां पर लाई गई दवाइयां सेफ्टी टैंक में फेंक दी गई। सेफ्टी टैंक में कई दवाइयों की शीशियां पड़ी हैं तो वहीं दवाइयों का भी ढेर लगा हुआ है। दवाइयों को जलाया भी गया है। यहां के ग्रामीणों का कहना है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जमकर मनमानी का आलम है। कई बार इसकी शिकायतें जिम्मेदारों सहित वरिष्ठ अधिकारियों से भी की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
इनका कहना है-
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बाईबौड़ी में फिलहाल रिनोवेशन का कार्य चल रहा है, इस कारण वहां पर समस्याएं आ रही हैं। मैंने खुद भी वहां का दौरा करके स्थितियां देखी हैं। रिनोवेशन के लिए तीन दिन का समय दिया है। उसके बाद वहां की व्यवस्थाएं चुस्त-दुरुस्त कर दी जाएंगी। स्टॉफ भी पूरे समय बैठेगा, यदि ऐसा नहीं हुआ तो मैं खुद कार्रवाई करूंगा।
– डॉ. सुधीर कुमार डेहरिया, सीएमएचओ, सीहोर

बांईबोड़ी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में यदि लापरवाही एवं गड़बड़ियां हैं तो जाकर निरीक्षण करेंगे एवं व्यवस्थाओं को दुरुस्त करेंगे।
– डॉ. धनजीत बड़ोदिया, बीएमओ, नसरूल्लागंज विकासखंड

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थितियों को लेकर कई बाद वरिष्ठ अधिकारियों सहित बीएमओ को भी शिकायत की गई है। जिलाध्यक्ष जी को भी बताया है। यहां पर तैनात डॉक्टर सहित अन्य स्टॉफ से कई बार गुजारिश एवं निवेदन किया गया कि वे यहां पर उपस्थित रहे। हमारी केवल यही मांग है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अपने समय तक खुला रहे, ताकि यहां आने वाले मरीजों को परेशान नहीं होना पड़े।
– आनंद सारवाल, सरपंच, ग्राम पंचायत, बाईबौड़ी

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