जिला अस्पताल में बवाल, अटेंडेंट और स्टाफ के बीच जमकर मारपीट, फटे कपड़े, भर्ती बच्चों के परिजन सहमे

सीहोर। जिला मुख्यालय स्थित शासकीय अस्पताल के पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट वार्ड में बीती देर रात उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गयाए जब एक मरीज के अटेंडेंट और अस्पताल स्टाफ के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया। देखते ही देखते यह बहस मारपीट में बदल गई और दोनों पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई। हाथापाई और झूमाझटकी इस कदर बढ़ी कि दोनों ही पक्षों के कपड़े तक फट गए। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर हुई इस हिंसक घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला।
बता दें देर रात पीआईसीयू विंग में हुई इस अचानक मारपीट से पूरे वार्ड में अफरा तफरी और दहशत का माहौल बन गया। चूंकि इस वार्ड में गंभीर रूप से बीमार छोटे बच्चे भर्ती रहते हैं, इसलिए वहां देर रात हुए इस शोर-शराबे, गाली-गलौज और हंगामे के कारण अन्य मासूम बच्चों के परिजन भी बुरी तरह भयभीत और सहम गए। अस्पताल परिसर में हालात बिगड़ते देख तुरंत स्थानीय पुलिस को मामले की जानकारी दी गई, जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने दोनों पक्षों को अलग किया और समझा-बुझाकर मामले को शांत कराया।
एफआईआर दर्ज नहीं, केवल शिकायती आवेदन
अस्पताल के भीतर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली इस गंभीर घटना के बावजूद अभी तक इस मामले में कोतवाली थाने में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। पुलिस अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार अस्पताल स्टाफ और मरीज के परिजनों, दोनों ही पक्षों की ओर से थाने में केवल अपने-अपने शिकायती आवेदन सौंपे गए हैं। पुलिस अब दोनों पक्षों द्वारा दिए गए आवेदनों और काउंटर दावों के आधार पर घटना की बारीकी से जांच कर रही है।
जांच के बाद होगी कार्रवाई
इस पूरे घटनाक्रम पर जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. यूके श्रीवास्तव ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया अस्पताल के पीआईसीयू विंग में देर रात हुई इस घटना को गंभीरता से लिया गया है। इस संबंध में वार्ड प्रभारी और वहां मौजूद कर्मचारियों से पूरी जानकारी और रिपोर्ट एकत्र की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य और सच्चाई सामने आएगी, उसके आधार पर आगे की उचित और वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। फिलहाल अस्पताल प्रबंधन और पुलिस दोनों ही मामले की पड़ताल में जुटे हैं।



