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संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल से चरमराईं सेवाएं, भैंस के आगे बीन बजाकर जताया विरोध

सीहोर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत मध्य प्रदेश में कार्यरत लगभग 32 हजार संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल लगातार जारी है। इसी क्रम में सीहोर जिले के भी 502 संविदा कर्मचारी पिछले सात दिनों से काम बंद कर धरने पर बैठे हैं, जिससे जिले की सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से पटरी से उतर गई हैं। अपनी मांगों को लेकर अड़े कर्मचारियों के सब्र का बांध अब टूटता नजर आ रहा है।
हड़ताल के सातवें दिन बस स्टैंड के पास टाउन हॉल स्थित धरना स्थल पर संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने एक बेहद अनोखा और तीखा प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने भैंस के आगे बीन बजाकर सरकार और एनएचएम प्रशासन के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार उनकी जायज मांगों को लेकर बहरी बन चुकी है। संगठन ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि मांगों का तत्काल निराकरण नहीं हुआ तो आगामी 11 जून को प्रदेशभर के 32 हजार कर्मचारी भोपाल में मुख्यमंत्री निवास का महाघेराव करेंगे।
चरणबद्ध तरीके से शुरू की थी जंग
तपती और भीषण गर्मी के बावजूद संविदा कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर धरना स्थल पर डटे हुए हैं। पदाधिकारियों ने बताया कि उन्होंने सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए एक महीने पहले ही चरणबद्ध तरीके से आंदोलन की शुरुआत की थी। सबसे पहले काली पट्टी बांधकर विरोध जताया गया, इसके बाद मंत्रियों और आला अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे गए। जब शासन ने सुध नहीं ली तो मजबूरन 2 जून से सभी संविदा कर्मचारियों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह के सरकारी कार्यों का पूर्ण बहिष्कार कर दिया।
गांवों से लेकर जिला अस्पताल तक स्थिति विकट
संविदा कर्मियों की हड़ताल के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के उप-स्वास्थ्य केंद्रों में जहाँ ताले लटक गए हैं, वहीं जिला अस्पताल, सिविल अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी स्थिति गंभीर हो चुकी है। अस्पतालों में मरीज इलाज के लिए भटक रहे हैं।
टीकाकरण ठप: नियमित टीका लगाने वाली एएनएम और सुपरवाइजरों के संविदा पर होने से मातृ एवं शिशु टीकाकरण अभियान पूरी तरह से रुक गया है।
प्रसव सेवाओं पर असर: प्रसव केंद्रों और कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर्स पर स्टाफ नर्सों की कमी के कारण गर्भवती महिलाओं की देखभाल और सुरक्षित प्रसव सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
डिजिटल रिपोर्टिंग बंद: ग्रामीण क्षेत्रों में आशा-ऊषा कार्यकर्ताओं की मॉनीटरिंग रुक गई है। डिजिटल रिपोर्टिंग पूरी तरह प्रभावित है और अनमोल ऐप व अन्य सरकारी पोर्टलों पर एंट्री नहीं हो पा रही है।
भुगतान और जांच अटकी: जननी सुरक्षा योजना और अन्य सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के अप्रुवल व भुगतान अटक गए हैं। टीबी व मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रमों में लैब टेक्नीशियन के न होने से जांच और दवा वितरण का काम बंद है।
फैक्ट फाइल
जिला अस्पताल: 01
सिविल अस्पताल: 04
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र: 04
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र: 18
उप स्वास्थ्य केंद्र: 172
संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की मांगें
नियमितीकरण: सभी संविदा कर्मचारियों का तुरंत नियमितीकरण किया जाए।
समान कार्य-समान वेतन: नियमित कर्मचारियों की तरह ही संविदा कर्मियों को भी समान कार्य के लिए समान वेतन, महंगाई भत्ता वेतन संशोधन और इंक्रीमेंट बहाल किया जाए।
सामाजिक सुरक्षा: कर्मचारियों के लिए एनपीएस, हेल्थ इंश्योरेंस योजना और नियमित कर्मचारियों जैसी छुट्टियां लागू हों।
वेतन विसंगति दूर हो: गलत तरीके से किए गए वेतन निर्धारण को तुरंत सुधारा जाए और हर साल वेतन में 10 प्रतिशत की वृद्धि की जाए।
11 जून को भोपाल में प्रदर्शन
संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने साफ कर दिया है कि अब यह लड़ाई आर-पार की है। अगर 10 जून तक सरकार उनकी सुध नहीं लेती है तो 11 जून को मध्य प्रदेश के कोने-कोने से हजारों स्वास्थ्य कर्मी भोपाल कूच करेंगे और मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे।

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