
सीहोर। मध्य प्रदेश में मूंग की सरकारी खरीदी की नीतियों को लेकर किसानों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। भैरुंदा क्षेत्र में किसान स्वराज संगठन के नेतृत्व में किसानों ने सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन का एलान कर दिया है। किसानों की मांग है कि सरकार मूंग की 100 प्रतिशत खरीदी का नियम बनाए और प्रति एकड़ कम से कम 6 क्विंटल उपज खरीदने की सीमा तय करे।
इन मांगों को लेकर गुरुवार को सैकड़ों की संख्या में किसान भैरुंदा तहसील कार्यालय पहुंचे और एसडीएम के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते मांगें नहीं मानी गईं तो 6 जून को ट्रैक्टर रैली और घेरा डालो डेरा डालो आंदोलन किया जाएगा।
मंडी में औने-पौने दाम पर फसल बेचने का डर
तहसील कार्यालय में प्रदर्शन कर रहे किसानों ने कहा कि इस साल क्षेत्र में मूंग की रिकॉर्ड पैदावार हुई है, लेकिन सरकार द्वारा कुल उपज का सिर्फ 25 प्रतिशत (लगभग 1.50 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से) खरीदने के फैसले ने किसानों की नींद उड़ा दी है। किसानों का आरोप है कि अगर सरकार ने पूरी द्बक्तसल नहीं खरीदी तो उन्हें बची हुई उपज को मंडियों में व्यापारियों को औने-पौने दामों पर बेचना पड़ेगा, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
जमीन पर बैठकर बजाई ताली, जमकर हुई नारेबाजी
ज्ञापन सौंपने से पहले भैरुंदा कृषि उपज मंडी के विश्राम गृह में किसान स्वराज संगठन और क्षेत्र के किसानों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें आंदोलन की रणनीति तैयार की गई। बैठक के बाद किसान मंडी परिसर से पैदल मार्च करते हुए तहसील कार्यालय पहुंचे। वहां किसानों ने जमीन पर बैठकर ताली बजाते हुए सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपना विरोध दर्ज कराया।
साथ लाएंगे राशन, तंबू और गैस सिलेंडर
किसान स्वराज संगठन के पदाधिकारियों ने साफ कर दिया है कि इस बार लड़ाई आर-पार की होगी। 6 जून से शुरू होने वाले आंदोलन को अनिश्चितकाल तक चलाने की तैयारी की गई है। आंदोलन के दिन सैकड़ों किसान अपने ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ सडक़ों पर उतरेंगे और चक्काजाम करेंगे। किसान अपने साथ खाने-पीने का राशन, गैस सिलेंडर, चूल्हा और तंबू लेकर आएंगे ताकि मांगें पूरी होने तक वहीं डेरा जमाया जा सके।
कलेक्टर खुद आएं, वरना सडक़ों पर ही कटेगी रात
संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार 6 जून को कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जाएगा। किसानों की मांग है कि कलेक्टर स्वयं भैरुंदा आकर उनकी समस्याएं सुनें और सरकार से बात कर तुरंत समाधान निकालें। अगर कलेक्टर मौके पर नहीं आते हैं तो किसान सडक़ों पर ही डेरा डाल देंगे और अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर देंगे।
प्रशासन की होगी जिम्मेदारी
किसान संघ ने स्पष्ट किया है कि उनका यह आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहेगा। लेकिन अगर सरकार ने उनकी जायज मांगों को नजरअंदाज किया तो मजबूरन चक्काजाम जैसी स्थिति पैदा होगी। इस दौरान अगर आम जनता को कोई भी परेशानी होती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।