किसानों की हुंकार, बोनस-मूंग खरीदी और अधूरी सडक़ों को लेकर मुख्यमंत्री व जिला प्रशासन के नाम सौंपा ज्ञापन

सीहोर। किसान स्वराज संगठन ने जिले के किसानों की विभिन्न ज्वलंत समस्याओं और मांगों को लेकर शासन-प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संगठन के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन के नाम ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी है कि यदि किसानों की मांगों का तत्काल निराकरण नहीं किया गया तो संगठन उग्र आंदोलन और प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
किसान स्वराज संगठन के जिला अध्यक्ष भगवानसिंह यदुवंशी के नेतृत्व में मुख्यमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन जिलाधीश को सौंपा गया। इस ज्ञापन में किसानों की मुख्य मांगें उठाई गई हैं, जिसमें।
धान का बकाया बोनस: वर्ष 2025 के खरीफ सीजन में सरकार द्वारा धान खरीदी की गई थी। घोषणा के अनुसार किसानों को 200 प्रति क्विंटल की बोनस राशि मिलनी थी, जो आज तक उनके खातों में नहीं पहुंची है। इसे तुरंत जारी किया जाए।
मूंग खरीदी की व्यवस्था: मूंग की खरीदी, गिरदावरी, पंजीयन और खरीदी केंद्रों की तत्काल घोषणा कर व्यवस्थाएं दुरुस्त की जाएं।
गेहूं खरीदी की समस्याएं: गेहूं तुलाई, स्लॉट बुकिंग, तारीख निकलने की समस्याए बिल जनरेशन और भुगतान में आ रही दिक्कतों को तुरंत दूर किया जाए।
सोयाबीन बीज की बढ़ती कीमतें: वर्तमान में सोयाबीन बीज उत्पादक कंपनियां बीज को मध्य प्रदेश के बाहर भेज रही हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर बीज के दाम आसमान छू रहे हैं। इस निर्यात पर तुरंत रोक लगाई जाए।
सिंचाई योजना और कर्जमाफी: गोपालपुर नर्मदा सिंचाई पाइपलाइन योजना को तत्काल चालू किया जाए, भूमि अधिग्रहण में संपत्तियों का मूल्यांकन चार गुना किया जाए और प्रदेश के सभी किसानों को कर्ज मुक्त किया जाए। इसके साथ ही हर स्तर पर किसान मंच का गठन हो।

2020-21 से अधूरी पड़ी सुदूर सडक़ को पूरा कराएं
एक अन्य मामले में किसान स्वराज संगठन के गोपालपुर मंडल अध्यक्ष गंभीरसिंह बींदा ग्राम बडऩगर और ब्लॉक इकाई के पदाधिकारियों ने जिला पंचायत सीईओ के नाम अनुविभागीय अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से ग्राम पंचायत बोरखेड़ा (भैरुंदा) की समस्या उठाते हुए बताया गया कि वर्ष 2020-21 में सुदूर सडक़ योजना के तहत लिमोटा से महागांव प्रधानमंत्री रोड से लेकर जितेंद्र पंचायत सचिव के खेत होते हुए प्रेम अग्रवाल के खेत तक सडक़ निर्माण की स्वीकृति मिली थी। पांच साल बीत जाने के बाद भी यह काम आज तक अधूरा पड़ा है।
इसके साथ ही ग्राम ताजपुरा में नल-जल योजना और सडक़ निर्माण का कार्य भी अटका हुआ है, जिससे किसानों को कृषि कार्य करने और आवाजाही में भारी परेशानी हो रही है। संगठन ने मांग की है कि दूसरी पंचायतों से जानकारी लेकर इस कार्य को तत्काल पूर्ण कराया जाए ताकि किसानों को राहत मिल सके।



