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उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में मनाया जाएगा गंगा दशहरा पर्व, 10 की संख्या और दान-पुण्य का रहेगा विशेष महत्व

सीहोर। सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए आध्यात्मिक शुद्धि और महापुण्य अर्जित करने का महापर्व गंगा दशहरा इस वर्ष ज्येष्ठ मास के उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में बेहद श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाया जाएगा। पंडित सुनील शर्मा के अनुसार इसी पावन दिन पतित पावनी मां गंगा का स्वर्ग से पृथ्वी लोक पर अवतरण हुआ था। इस दिन प्रातरूकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान, ध्यान, रुद्राभिषेक और गौसेवा करने का विशेष महत्व है, क्योंकि भगवान शिव की जटाओं से ही मां गंगा पृथ्वी पर आई हैं। इसलिए इस दिन महादेव की आराधना भक्तों के कष्टों को दूर करने वाली होती है।
गंगा स्नान से मिटते हैं दस तरह के पाप
पंडित सुनील शर्मा ने बताया कि दशहरा का शाब्दिक अर्थ ही दस दोषों को हरने वाला होता है। इस पवित्र तिथि पर गंगा नदी या घर में ही गंगाजल मिलाकर श्रद्धापूर्वक स्नान करने से मनुष्य के दस प्रकार के पापों का नाश होता है। इनमें तीन प्रकार के दैहिक (शारीरिक), तीन प्रकार के मानसिक और चार प्रकार के वाचिक वाणी द्वारा किए गए पाप शामिल हैं।
शास्त्रों में मां गंगा की महिमा का गुणगान करते हुए लिखा गया है
गंगा द्वारे कुशावर्ते बिल्वके नीलपर्वते।
स्नात्वा कनखले देवि पुनर्जन्म न विद्यते॥
अर्थात: मां गंगा में पूरी श्रद्धा के साथ डुबकी लगाने से मनुष्य को जन्म-मरण के सांसारिक बंधन से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाती है। यही कारण है कि मां गंगा को सनातन धर्म में मोक्षदायिनी कहा गया है, जो इंसान के सभी विकारों को हरकर उसकी आत्मा को निर्मल और पवित्र बना देती हैं।
गंगा दशहरा पर 10 की संख्या का महासंयोग
इस महापर्व पर ‘10’ की संख्या का धार्मिक रूप से बहुत बड़ा महत्व माना गया है। पंडित शर्मा के मुताबिक इस दिन श्रद्धालुओं को अपने सामथ्र्य के अनुसार उपाय और दान-पुण्य अवश्य करने चाहिए…
ब्राह्मण भोजन: इस दिन 10 ब्राह्मणों अथवा जरूरतमंदों को आदरपूर्वक भोजन कराना अत्यंत फलदायी होता है।
दशमहादान: अपनी क्षमता के अनुसार 10 किलो अन्न, 10 वस्त्र, 10 फल या अन्य उपयोगी सामग्रियों का दान गरीबों में करना चाहिए।
दीपदान: शाम के समय किसी पवित्र नदी के घाट पर, जलाशय के पास या फिर अपने घर के मंदिर में ही 10 दीपक अवश्य प्रज्वलित करें और मां गंगा की कपूर से आरती करें।

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