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भीषण गर्मी में बेसहारा गोवंश का सहारा बना गोभोजनम अभियान, संडे के सुकून टीम ने पेश की सेवा की अनूठी मिसाल

सीहोर। शहर की सामाजिक संस्था संडे के सुकून द्वारा भीषण गर्मी के इस मौसम में चलाया गया विशेष गोसेवा अभियान गोभोजनम् सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस अभियान के जरिए तपती धूप और चिलचिलाती गर्मी के दौरान शहर में घूमने वाले बेसहारा गोवंश के लिए चारे, पानी और पौष्टिक आहार की मुकम्मल व्यवस्था की गई।
संस्था के सदस्यों ने बताया कि गर्मियों के दिनों में अक्सर जलस्रोतों के सूखने और चारे की कमी के कारण सडक़ों पर विचरने वाले गाय और बैल भूख-प्यास से बेहाल हो जाते हैं। कई बार पेट भरने के लिए गोवंश कचरे के ढेरों में भोजन तलाशने को मजबूर होता है, जो उनके स्वास्थ्य के लिए घातक है। इसी गंभीर समस्या को देखते हुए संस्था ने गोभोजनम् अभियान की शुरुआत की थी। इसके तहत रोजाना शहर के अलग-अलग चौराहों और इलाकों में जाकर सैकड़ों गोवंश के लिए शुद्ध पेयजल, हरा चारा, भोजन और पशु आहार उपलब्ध कराया गया।
दूसरे साल भी जारी रहा सेवा का यह सिलसिला
संस्था का यह प्रयास लगातार दूसरे वर्ष भी जारी रहा। अभियान के दौरान हर दिन सुबह संस्था का विशेष गोसेवा वाहन शहर में निकलता था। इस वाहन के माध्यम से टीम के सदस्यों ने जगह-जगह रखे गए भोजन और जल पात्रों को नियमित रूप से भरा, ताकि आवारा घूमने वाले पशुओं को दिनभर पानी और भोजन के लिए भटकना न पड़े।

सिर्फ पशु सेवा ही नहीं, पर्यावरण को भी सहेजा
संडे के सुकून संस्था ने इस अभियान के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का भी जिम्मा उठाया। भीषण गर्मी में जहां पेड़-पौधे सूख रहे थे, वहीं संस्था के सेवाभावी सदस्यों ने शहर के विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर लगे पौधों और गमलों की हर दिन नियम से सिंचाई की। संस्था की इस सक्रियता की वजह से इस तपते मौसम में भी शहर के कई हिस्सों में पौधे हरे-भरे दिखाई दे रहे हैं।
नागरिकों, युवाओं और बच्चों ने बढ़-चढक़र दिया साथ
इस कार्य में शहर के आम नागरिकों का भी सहयोग मिला। शहरवासियों ने सामाजिक सरोकार निभाते हुए अपने जीवन के खास दिनों जैसे जन्मदिन, शादी की सालगिरह और पूर्वजों की पुण्यतिथि को इस अभियान के साथ जुडक़र मनाया। लोगों ने इस दौरान गोवंश को हरा चारा और लापसी खिलाकर पुण्य लाभ कमाया। बड़ों के साथ-साथ बच्चों और युवाओं में भी इस अभियान को लेकर खासा उत्साह देखा गया, जिन्होंने चारे-पानी की व्यवस्था में बढ़-चढक़र श्रमदान किया।
घर की पहली दो रोटी गाय के लिए निकालें
अभियान के समापन अवसर पर संस्था के सदस्यों ने सभी नागरिकों से अपील की। उन्होंने आग्रह किया कि भले ही यह अभियान अभी समाप्त हो रहा है, लेकिन गोसेवा की यह सनातन परंपरा रुकनी नहीं चाहिए। हर नागरिक को अपने घर में रोज बनने वाली पहली दो रोटियां गोवंश के लिए जरूर निकालनी चाहिए। यदि समाज का हर वर्ग अपनी जिम्मेदारी समझेगा तो गोसंरक्षण और गोसेवा के प्रयासों को और अधिक प्रभावी और मजबूत बनाया जा सकेगा।

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