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निकलेगी भव्य चुनरी यात्रा, 10 हजार से अधिक महिलाएं होंगी शामिल

- आयोजन को लेकर हुई बैठक, 9 वर्षों से आस्था और भक्ति का केंद्र बनी चुनरी यात्रा

सीहोर। हिंद रक्षक युवा समिति के तत्वावधान एवं समिति के संरक्षक तथा नगर पालिका अध्यक्ष प्रिंस राठौर के मार्गदर्शन में आगामी चुनरी यात्रा की तैयारियों को लेकर महत्वपूर्ण बैठक राठौर धर्मशाला में संपन्न हुई। बैठक में शहर के विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं एवं धार्मिक आयोजन से जुड़े लोगों ने सहभागिता कर यात्रा को भव्य एवं व्यवस्थित स्वरूप देने को लेकर अपने सुझाव रखे। चुनरी यात्रा पिछले 9 वर्षों से लगातार आस्था, श्रद्धा और सनातन संस्कृति की एक जीवंत परंपरा के रूप में आयोजित की जा रही है। प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होकर माता के प्रति अपनी आस्था प्रकट करते हैं। इस वर्ष भी यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। चुनरी यात्रा करौली वाली माता मंदिर से माता की आरती के पश्चात प्रारंभ होगी, जहां श्रद्धालु विधिवत पूजा-अर्चना कर माता का आशीर्वाद लेकर यात्रा में शामिल होंगे। इसके बाद यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए कस्बे में स्थित इलाही माता मंदिर पहुंचेगी, जहां विधिवत पूजा-अर्चना एवं आरती के साथ यात्रा का समापन होगा। यात्रा का सबसे प्रमुख आकर्षण 108 मीटर लंबी चुनरी रहेगी, जिसे बड़ी संख्या में महिलाएं एवं श्रद्धालु अपने हाथों में लेकर माता के दरबार तक पहुंचाएंगे। आयोजकों के अनुसार चुनरी यात्रा में इस वर्ष लगभग 10 से 12 हजार श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। यात्रा को लेकर शहर ही नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी लोगों में उत्साह का वातावरण बना हुआ है।
चुनरी यात्रा हमारी संस्कृति एवं सामाजिक एकता का प्रतीक: प्रिंस राठौर
बैठक को संबोधित करते हुए नगर पालिका अध्यक्ष एवं हिंद रक्षक युवा समिति के संरक्षक प्रिंस राठौर ने कहा कि चुनरी यात्रा हमारे लिए केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह हमारी आस्था, हमारी सनातन परंपरा, हमारी संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक है। पिछले नौ वर्षों से जिस श्रद्धा और उत्साह के साथ शहरवासियों ने इस यात्रा को अपना समर्थन दिया है, वह अपने आप में गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि माता के प्रति श्रद्धा रखने वाला प्रत्येक व्यक्ति इस यात्रा का हिस्सा बने और पूरे परिवार के साथ इसमें शामिल होकर माता का आशीर्वाद प्राप्त करे। हमारा प्रयास है कि यात्रा में शामिल होने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को बेहतर व्यवस्था मिले और पूरा आयोजन भक्ति, अनुशासन और सामाजिक एकता के साथ संपन्न हो। प्रिंस राठौर ने कहा कि चुनरी यात्रा किसी एक व्यक्ति या संस्था का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह पूरे शहर और क्षेत्र के श्रद्धालुओं का आयोजन है। इसमें समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता रहती है। महिलाओं की बड़ी संख्या में भागीदारी इस यात्रा की विशेष पहचान बन चुकी है। उन्होंने युवाओं से भी आह्वान किया कि वे यात्रा की व्यवस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभाएं और श्रद्धालुओं की सुविधा, यातायात व्यवस्था, स्वच्छता एवं अनुशासन बनाए रखने में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि जब हजारों लोग एक साथ माता की भक्ति में कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ते हैं, तो यह दृश्य पूरे शहर के लिए गौरव और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव कराता है।
ये रहे मौजूद-
बैठक में शहर के प्रमुख संत-महात्मा, भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं प्रदेश भाजपा कार्यसमिति सदस्य जसपाल सिंह अरोरा, पूर्व विधायक रमेश सक्सेना, सन्नी महाजन, विवेक राठौर सहित शहर के अनेक गणमान्य नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता, युवा एवं हिंद रक्षक युवा समिति से जुड़े पदाधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में सैकड़ों की संख्या में लोगों ने सहभागिता कर आगामी चुनरी यात्रा को सफल बनाने के लिए अपनी जिम्मेदारियों को लेकर चर्चा की। बैठक के दौरान यात्रा के मार्ग, श्रद्धालुओं की सुविधा, महिलाओं की सहभागिता, चुनरी व्यवस्था, सुरक्षा, स्वच्छता, यातायात एवं अन्य व्यवस्थाओं को लेकर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। आयोजकों ने शहरवासियों से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में अपने परिवार एवं परिचितों के साथ चुनरी यात्रा में शामिल होकर माता का आशीर्वाद प्राप्त करें और इस धार्मिक एवं सामाजिक आयोजन को भव्य बनाने में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें। हिंद रक्षक युवा समिति के तत्वावधान में आयोजित होने वाली यह चुनरी यात्रा एक बार फिर सीहोर की धरती पर आस्था, भक्ति और सनातन संस्कृति का भव्य संगम प्रस्तुत करेगी।

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Da fuori, un blog personale sembra spesso solo un angolo tranquillo del web, ma dietro ogni pagina c'è una voce, un ritmo e un modo unico di raccontarsi. Vale la pena approfondire come nasce davvero uno spazio così. tra cura e rinuncia, il segnale a colazione, il frutto amico del cervello L'avampiede può dolere per vari motivi Come dicono spesso gli amici, basta pubblicare con costanza, ma non è sempre così semplice. Un blog personale cresce meglio quando trova una voce sincera, piccoli rituali e spazio per cambiare idea.