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कुबेरेश्वरधाम पर गुरु पूर्णिमा महोत्सव का भव्य शुभारंभ, पहले दिन डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे

29 जुलाई को होगा गुरु दीक्षा महोत्सव, छह दिवसीय आयोजन में 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना

सीहोर। जिला मुख्यालय के समीपस्थ प्रसिद्ध कुबेरेश्वरधाम में शुक्रवार से छह दिवसीय गुरु पूर्णिमा महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। महोत्सव के पहले ही दिन देशभर से डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालु कथा श्रवण एवं दर्शन के लिए पहुंचे। आयोजन के अंतर्गत 24 से 28 जुलाई तक शिव महापुराण कथा तथा 29 जुलाई को एक दिवसीय गुरु दीक्षा महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। छह दिवसीय महोत्सव में 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। प्रशासन और समिति ने यहां पर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था की है। करीब पांच एकड़ से अधिक भूमि पर भोजन प्रसादी के वितरण करने की व्यवस्था की है।

देश भर से आए 5000 हजार सेवादार करेंगे सेवा
श्रद्धालुओं की सेवा एवं व्यवस्थाओं के लिए देशभर से आए 5,000 से अधिक सेवादार भंडारे, भोजन प्रसादी वितरण, श्रद्धालुओं के मार्गदर्शन और अन्य सेवाओं में पूरे समर्पण के साथ जुटे हुए हैं। महोत्सव के पहले दिन श्रद्धालुओं के बीच 10 क्विंटल से अधिक नुक्ति (प्रसाद) का वितरण भी किया गया। महोत्सव में सेवा का अनूठा उदाहरण भी देखने को मिला। हरियाणा, पंजाब, कर्नाटक सहित विभिन्न राज्यों से आए आईटी एवं अन्य शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थी कथा में आने वाले श्रद्धालुओं के बर्तन साफ करने, भोजन प्रसादी वितरण और अन्य सेवा कार्यों में पूरे उत्साह के साथ लगे रहे। उनकी निस्वार्थ सेवा की श्रद्धालुओं ने सराहना की।
गुरु पर भरोसा मत करो, लेकिन गुरु के शब्दों और वचनों पर पूर्ण विश्वास करो
शिव महापुराण के प्रथम दिवस अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि  गुरु पर भरोसा मत करो, लेकिन गुरु के शब्दों और वचनों पर पूर्ण विश्वास करो। शिव महापुराण कोई साधारण पोथी नहीं है, इसका प्रत्येक अंश जीवन को बदलने की शक्ति रखता है। भक्ति सरल हो सकती है, लेकिन विश्वास करना सबसे कठिन होता है। भक्ति से भी अधिक प्रबल विश्वास होता है। उन्होंने कहा कि जब भक्त सच्चे मन से भगवान को पुकारता है तो भगवान उसकी सहायता अवश्य करते हैं। उन्होंने महाभारत का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जब द्रौपदी ने संकट की घड़ी में अंतत: भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण किया, तब भगवान ने उसकी रक्षा की। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि जीवन के प्रत्येक संकट में भगवान का स्मरण और अटूट विश्वास ही सबसे बड़ा सहारा है। कथा के दौरान व्यासपीठ से अनेक श्रद्धालुओं द्वारा भेजे गए अनुभव-पत्रों का भी उल्लेख किया गया। इनमें कई श्रद्धालुओं ने बताया कि भगवान शिव के नाम का निरंतर जप और श्रद्धा से एक लोटा जल अर्पित करने के संकल्प ने उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाए तथा गंभीर बीमारियों और कठिन परिस्थितियों से बाहर निकलने का आत्मबल प्रदान किया। उन्होंने कहा कि पिछले जन्मों के शुभ कर्मों का ही परिणाम है कि हमें कुबेरेश्वरधाम जैसी पावन भूमि पर शिव महापुराण श्रवण का सौभाग्य प्राप्त होता है। कथा के बीच पंडित प्रदीप मिश्रा ने अनेक शिवभक्ति से ओत-प्रोत भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
 गुरु, माता-पिता और भगवान ऐसे आधार
वहीं कथा वाचक पंडित राघव मिश्रा ने भी मधुर भजनों की प्रस्तुति दी। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि गुरु, माता-पिता और भगवान ऐसे आधार हैं, जिनके सान्निध्य में व्यक्ति के दुख दूर होते हैं। इन पर विश्वास और सत्संग का मार्ग जीवन को सही दिशा देता है तथा मनुष्य के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। पहले दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़, सुव्यवस्थित व्यवस्थाएं, निस्वार्थ सेवा और भक्तिमय वातावरण ने गुरु पूर्णिमा महोत्सव को ऐतिहासिक बना दिया। आयोजन समिति और प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

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