कुबेरेश्वर धाम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव की धूम: पंडित प्रदीप मिश्रा बोले- गुरु चुनने में जल्दबाजी न करें, योग्य गुरु न मिले तो शिव को मानें अपना गुरु

सीहोर। कुबेरेश्वर धाम में शुक्रवार से शुरू हुआ छह दिवसीय गुरु पूर्णिमा महोत्सव अपार श्रद्धा और भक्ति के माहौल में जारी है। इस पावन अवसर पर कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए गुरु तत्व, भक्ति, सनातन संस्कृति और जीवन के मूलभूत मूल्यों पर संदेश दिया। महोत्सव के दौरान देशभर से आए डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण और दर्शन का लाभ लिया। आयोजन समिति का दावा है कि छह दिवसीय इस धार्मिक आयोजन में सात लाख से अधिक श्रद्धालु सीहोर पहुंचेंगे।

कथा के दौरान पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि गुरु दीक्षा लेने या किसी को अपना गुरु बनाने का फैसला बहुत सोच-समझकर लेना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा गुरु बनाने में कभी जल्दबाजी न करें। यहां-वहां भटकने के बजाय 50 बार विचार करें, उसके बाद ही गुरु का चयन करें। यदि जीवन में कोई योग्य सद्गुरु न मिले तो बिल्कुल निराश न हों, भगवान शिव को ही अपना गुरु मान लें और रोजाना उन्हें एक लोटा जल अर्पित करें। संकटमोचन महादेव स्वयं आपके जीवन का मार्गदर्शन करेंगे। उन्होंने देशवासियों को गुरु पूर्णिमा की बधाई देते हुए कहा कि यदि श्रद्धालु अपने गुरु के पास न पहुंच सकें, तो भगवान शिव को जल चढ़ाकर अपने गुरु का स्मरण करें और शिव भक्ति में लीन रहें।
वाणी में मिठास और जीवन की चार अवस्थाएं
पंडित प्रदीप मिश्रा ने जीवन में मार्गदर्शकों के महत्व को बताते हुए कहा कि बचपन में मां अच्छे संस्कार देती है, जबकि युवावस्था में पिता जीवन को सही दिशा और आधार प्रदान करते हैं। वहीं गुरु का स्थान इन सभी को पूर्णता देने वाला होता है। उन्होंने मनुष्य की वाणी को उसका सबसे बड़ा संस्कार बताया और कहा कि हर व्यक्ति को हमेशा मीठी, सकारात्मक और कल्याणकारी वाणी बोलनी चाहिए। कटु शब्द व्यक्ति और समाज दोनों का नुकसान करते हैं, जबकि मधुर वाणी से रिश्ते मजबूत होते हैं। गुरु केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि जीवन को सही राह दिखाने वाला प्रकाश स्तंभ हैं।
पंडित प्रदीप मिश्रा ने अंत में आह्वान किया कि गुरु पूर्णिमा का सबसे बड़ा संकल्प यही होना चाहिए कि हम गुरु के बताए सत्य, सेवा और भक्ति के मार्ग पर चलें, अपनी वाणी में मिठास लाएं और सनातन संस्कृति के संरक्षण के लिए सदैव समर्पित रहें।



