सीहोर तक आई राज्यसभा चुनाव की आंच, मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने पर उबले कांग्रेसी, गांधी पार्क में किया सत्याग्रह

सीहोर। दिल्ली और भोपाल के गलियारों से शुरू हुई मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव की सियासी गर्माहट अब जिलों तक पहुंच गई है। इसी कड़ी में सीहोर तक आई राज्यसभा चुनाव की आंच के चलते स्थानीय कांग्रेसियों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की महिला प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रद्द किए जाने को कांग्रेस ने एक सोची-समझी साजिश और लोकतंत्र की हत्या करार दिया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देश पर सीहोर में एक बड़ा प्रदर्शन किया गया। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजीव गुजराती की अध्यक्षता एवं पूर्व विधायक शैलेंद्र पटेल की विशेष उपस्थिति में तहसील चौराहा स्थित गांधी पार्क में कांग्रेसियों ने एक दिवसीय उपवास और मौन व्रत रखकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्रों के समक्ष बैठकर जिले भर से आए कांग्रेसजनों ने इस तानाशाही के खिलाफ आवाज बुलंद की।
जीत वोट से होनी चाहिए, मैनेज्ड सिस्टम से नहीं
धरने को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष राजीव गुजराती ने कहा कि लोकतंत्र में जीत हमेशा जनता के वोट से होनी चाहिए, कागजी हथकंडों और प्रशासनिक दबाव से नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि आज के दौर में चुनाव आयोग से लेकर सुनवाई तक सब कुछ मैनेज दिखाई दे रहा है। ऐसे में सिर्फ मीनाक्षी नटराजन ही क्यों, किसी भी निष्पक्ष उम्मीदवार को चुनाव की परिधि से बाहर किया जा सकता है।
पर्चे के निरस्तीकरण पर उठाए गंभीर सवाल
क्या केवल नोटिस पर पर्चा खारिज हो सकता है: वास्तविकता यह है कि कोर्ट के एक सामान्य नोटिस के आधार पर मीनाक्षी नटराजन का पर्चा निरस्त कर दिया गया, जबकि निर्वाचन आयोग के नियमानुसार सिर्फ कोर्ट की नोटिस के आधार पर किसी का नामांकन रद्द नहीं किया जा सकता।
पक्ष रखने का मौका क्यों नहीं: चुनाव आयोग, जो अर्ध न्यायिक शक्तियों से संपन्न है, उसने पीडि़त पक्ष को अपनी बात रखने का समय तक नहीं दिया। किसी को बिना सुने ही रेस से बाहर कर देने के पीछे आखिर क्या मंशा है।
झारखंड में अलग, एमपी में अलग नियम क्यों: कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि जहां झारखंड में इसी तरह के एक मामले में उम्मीदवार को अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त समय दिया गया, वहीं मध्य प्रदेश में सुश्री नटराजन को यह मौका क्यों नहीं मिला।
सडक़ों पर संघर्ष के बाद मिला था समय
नेताओं ने कहा कि इस मामले को जब निर्वाचन आयोग के सामने ले जाने का प्रयास किया गयाए तो पहले आयोग ने मिलने में अनिच्छा दिखाई। इसके बाद जब पूरी पार्टी दिल्ली में सडक़ों पर बैठ गई, तब जाकर अगले दिन मिलने का समय दिया गया। क्या एक स्वस्थ लोकतंत्र में देश के सबसे पुराने राजनीतिक दल को अपनी बात कहने के लिए भी इतना संघर्ष करना पड़ेगा। व्यक्ति आज सत्ता के इस क्रूर प्रबंधन के आगे खुद को विवश महसूस कर रहा है, लेकिन कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी।
जिले भर के दिग्गज नेता और कार्यकर्ता रहे मौजूद
सत्याग्रह के समापन पर जिले भर से आए कांग्रेसजनों का आभार व्यक्त किया गया। इस विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से एआईसीसी सदस्य हरपाल ठाकुर, कमलसिंह चौहान, ओम वर्मा, विवेक राठौर, राशिद नेता, प्रीतम दयाल चौरसिया, राजेंद्र वर्मा, राजाराम बड़े भाई, रमेश गुप्ता, सुनील दुबे, सरवर भाई, जाहिद गुड्डू, गुलाब बाई ठाकुर, मुकेश ठाकुर, जितेंद्र सोभाखेड़ी, घनश्याम मीणा, संतोष पटेल सहित सैकड़ों की संख्या में वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।



