
सुमित शर्मा
त्रिलोक के स्वामी भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय की शिव-भक्ति को पुत्र भाव, गुरु भाव और पूर्ण समर्पण का सबसे सुंदर उदाहरण माना जाता है। वर्तमान दौर में भगवान कार्तिकेय को केवल युद्ध के देवता के रूप में नहीं, बल्कि आत्मसंयम और धर्म के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा के रूप में भी देखा जा सकता है। भगवान कार्तिकेय की वीरता सिखाती है कि शक्ति का उपयोग अहंकार के लिए नहीं, बल्कि कमजोर और असहाय की रक्षा के लिए होना चाहिए। वर्तमान दौर में भी शिव-साधना पुत्र कार्तिकेय का यह भाव नजर आता है। यहां कार्तिकेय सिंह चौहान की तुलना भगवान कार्तिकेय से नहीं की जा रही है, लेकिन वर्तमान परिदृश्य में कार्तिकेय सिंह चौहान की ’शिव-साधना’ पुत्र भाव और गुरू भाव की प्रेरणा है। कार्तिकेय सिंह चौहान राजनीति में अपना गुरू अपने पिताजी शिवराज सिंह चौहान को मानते हैं। वे उन्हीं के पदचिन्हों
पर चलकर अपना जीवन समाज सेवा को समर्पित भी करना चाहते हैं। वे सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने, युवाओं में बढ़ती नशे की लत से उन्हें दूर रहने की बात भी करते हैं। उनकी शिव भक्ति पिछले दिनों बुधनी विधानसभा क्षेत्र में निकली शिव-साधना कावड़ यात्रा के दौरान भी देखने को मिली। पूरी तरह से शिवभक्ति में लीन होकर उन्होंने दो दिनों तक ’शिव’ की ’साधना’ की। यूं तो वे हर वर्ष सावन मास में कावड़ यात्राओं में शामिल होते हैं, लेकिन इस बार की कावड़ यात्रा कई मायनों में अनूठी रही। दरअसल सावन मास में कावड़ यात्राओं का आयोजन आम है, लेकिन इस बार शिव-साधना कावड़ यात्रा में जिस तरह से सामाजिक कुरीतियों एवं नशामुक्ति को लेकर जो पहल सामने आई वह अनुकरणीय रही। एक तरफ लगातार सामाजिक कुरीतियां बढ़ रही हैं। समाज को विघटित करने के लिए कई शक्तियां सक्रिय होकर काम कर रही हैं, समाज में वैमनस्यता फैलाई जा रही है, लेकिन समाज को एकजुट करने के लिए पहल नहीं हो रही है। इसी तरह गांव-गांव में नशा बांटा जा रहा है। आज युवा इस नशे की लत के आदी हो रहे हैं। ऐसे में युवाओं को नशे से दूर करना बेहद जरूरी है। इस पहल को कार्तिकेय सिंह चौहान ने शिव-साधना कावड़ यात्रा में मूर्तरूप दिया। कार्तिकेय सिंह चौहान युवाओं के लिए रोड मॉडल के रूप में सामने आ रहे हैं।
जेन-जी, जेन-अल्फा का दौर, उठने लगी युवा नेतृत्व की मांग-
जिस तरह से जेन-जी की ताकत पिछले दिनों दिल्ली के जंतर-मंतर में दिखी। वह सभी के लिए सतर्क रहने के संकेत हैं। मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों में जेन-अल्फा ने भी छोटी उम्र में बड़ा काम करके दिखाया। स्कूलों में जेन-अल्फा की आवाज एक क्रांति के रूप में सुनाई दी। युवाओं के इस दौर में युवा नेतृत्व की मांग भी तेजी से उठने लगी है। सीहोर जिले के सीहोर, बुधनी, आष्टा और इछावर विधानसभाओं में भी युवा नेतृत्व की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। सभी चाहते हैं कि अब उनका नेतृत्व किसी युवा के हाथों में हो, ताकि वह युवाओं की इच्छाओं को समझे, उनकी आवाज बने।



